📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Biswarup Ganguly
स्थानीय
पंजाब कोर्ट ने मोहाली में भूमि अधिग्रहण मुआवजा 3.86 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय किया
✍️ Amar Ujala · Mohali
🗓 25 अग. 2026, 02:32 AM
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पंजाब हाई कोर्ट ने मोहाली में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को 3.86 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय कर दिया, जिससे भुगतान में बड़ी वृद्धि हुई।
पंजाब हाई कोर्ट ने आज मोहाली में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे को 3.86 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय करने का आदेश दिया। यह आदेश उन भूमि मालिकों द्वारा दायर याचिकाओं के बाद आया, जिन्होंने पूर्व भुगतान दरों में संशोधन की मांग की थी।
पहले इस क्षेत्र में मुआवजा दरें काफी कम थीं, जिससे किसानों और संपत्ति मालिकों को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप उचित भुगतान नहीं मिलने की चिंता थी। कोर्ट का निर्णय भुगतान को बढ़ाकर मोहाली के तेज़ी से शहरीकरण वाले क्षेत्र की वर्तमान जमीन कीमतों के करीब ले आया है।
कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला पंजाब के अन्य भूमि‑अधिग्रहण मामलों में भी मिसाल बन सकता है, जिससे चल रहे बुनियादी ढाँचा और रियल‑एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है। राज्य सरकार को प्रभावित पक्षों को सूचित कर निर्धारित समय सीमा के भीतर संशोधित भुगतान प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
डेवलपर्स और नगरपालिका अधिकारियों सहित सभी हितधारकों ने स्पष्टता की सराहना की, पर यह भी चेतावनी दी कि बढ़ी हुई लागत परियोजनाओं के समय‑सारिणी और बजट को प्रभावित कर सकती है। कोर्ट ने समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को आदेश दिया है, ताकि आगे के विवादों से बचा जा सके।
पहले इस क्षेत्र में मुआवजा दरें काफी कम थीं, जिससे किसानों और संपत्ति मालिकों को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप उचित भुगतान नहीं मिलने की चिंता थी। कोर्ट का निर्णय भुगतान को बढ़ाकर मोहाली के तेज़ी से शहरीकरण वाले क्षेत्र की वर्तमान जमीन कीमतों के करीब ले आया है।
कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला पंजाब के अन्य भूमि‑अधिग्रहण मामलों में भी मिसाल बन सकता है, जिससे चल रहे बुनियादी ढाँचा और रियल‑एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है। राज्य सरकार को प्रभावित पक्षों को सूचित कर निर्धारित समय सीमा के भीतर संशोधित भुगतान प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
डेवलपर्स और नगरपालिका अधिकारियों सहित सभी हितधारकों ने स्पष्टता की सराहना की, पर यह भी चेतावनी दी कि बढ़ी हुई लागत परियोजनाओं के समय‑सारिणी और बजट को प्रभावित कर सकती है। कोर्ट ने समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को आदेश दिया है, ताकि आगे के विवादों से बचा जा सके।