📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Veekthedragon
राजनीति
पंजाब कांग्रेस में खींचतान: चन्नी ने दीपेंद्र को सलाह, पूर्व डिप्टी सीएम ने सीएम चेहरा घोषित करने की मांग
✍️ Amar Ujala · Ludhiana
🗓 24 अग. 2026, 02:03 PM
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पंजाब कांग्रेस में फिर से उभरी आंतरिक खींचतान में चन्नी ने दीपेंद्र सिंह को नेतृत्व की सलाह दी, जबकि पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने 2027 के चुनाव से पहले उन्हें सीएम चेहरा घोषित करने की मांग की।
पंजाब कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनावों के करीब आते ही आंतरिक तनाव फिर से उभरे हैं। पार्टी के अध्यक्ष हरिंदर सिंह चन्नी ने वरिष्ठ नेता दीपेंद्र सिंह को एक प्रमुख भूमिका के लिए तैयार रहने की सलाह दी, जिससे पार्टी के नेतृत्व में संभावित बदलाव का संकेत मिला है।
यह सलाह उस समय आई जब पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर अटकलें तेज़ थीं। पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एक पार्टी सभा में दीपेंद्र सिंह को आधिकारिक रूप से कांग्रेस का चेहरा घोषित करने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि स्पष्ट उम्मीदवार चुनावी संभावनाओं को मजबूत करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव कांग्रेस के भीतर व्यापक अनिश्चितताओं को दर्शाता है, जो 2022 के चुनाव में हार के बाद से एकजुट मोर्चा पेश करने में कठिनाई झेल रही है। पार्टी की आंतरिक गतिशीलता उसके चुनावी रणनीति और मतदाता समर्थन को प्रभावित करेगी।
चन्नी और रंधावा दोनों ने एकजुटता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, पार्टी के सदस्यों से फड़फड़ाहट से बचने की अपील की। चुनाव कैलेंडर के करीब आते ही नेतृत्व का विवाद अभी भी अनसुलझा है।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि पंजाब में कांग्रेस को सत्ता फिर से हासिल करने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, और मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चयन निर्णायक भूमिका निभाएगा।
यह सलाह उस समय आई जब पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार को लेकर अटकलें तेज़ थीं। पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एक पार्टी सभा में दीपेंद्र सिंह को आधिकारिक रूप से कांग्रेस का चेहरा घोषित करने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि स्पष्ट उम्मीदवार चुनावी संभावनाओं को मजबूत करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव कांग्रेस के भीतर व्यापक अनिश्चितताओं को दर्शाता है, जो 2022 के चुनाव में हार के बाद से एकजुट मोर्चा पेश करने में कठिनाई झेल रही है। पार्टी की आंतरिक गतिशीलता उसके चुनावी रणनीति और मतदाता समर्थन को प्रभावित करेगी।
चन्नी और रंधावा दोनों ने एकजुटता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, पार्टी के सदस्यों से फड़फड़ाहट से बचने की अपील की। चुनाव कैलेंडर के करीब आते ही नेतृत्व का विवाद अभी भी अनसुलझा है।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि पंजाब में कांग्रेस को सत्ता फिर से हासिल करने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, और मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चयन निर्णायक भूमिका निभाएगा।