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20 अग. 2026
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‘टुकड़े‑टुकड़े गैंग’ व ‘दिमागी नक्सल’ लेबल ने राजनीति को हावी किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / IshaanMohzin
राजनीति

‘टुकड़े‑टुकड़े गैंग’ व ‘दिमागी नक्सल’ लेबल ने राजनीति को हावी किया

✍️ Counterview 🗓 20 अग. 2026, 07:39 AM 👁 7
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काउंटरव्यू के विश्लेषण में बताया गया है कि भारतीय राजनीति में अब तर्क‑वितर्क की जगह ‘टुकड़े‑टुकड़े गैंग’ व ‘दिमागी नक्सल’ जैसे लेबलों का प्रयोग बढ़ रहा है।

काउंटरव्यू के हालिया लेख में भारतीय राजनीति में तर्क‑वितर्क की जगह अपमानजनक लेबलों के प्रयोग में वृद्धि को उजागर किया गया है। “टुकड़े‑टुकड़े गैंग” व “दिमागी नक्सल” जैसे शब्दों को पार्टियों और मीडिया द्वारा विरोधियों को बिना नीति‑भेदों को छुए ब्रांड करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन शब्दों की उत्पत्ति पार्टियों के रेटोरिक से हुई है, पर अब वे मुख्यधारा की चर्चा में घुस चुके हैं, भाषणों, समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया में दिखाई देते हैं। इनका प्रयोग अक्सर वैकल्पिक आवाज़ों को राष्ट्रीय एकता के खतरे के रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि वे वैध राजनीतिक दल हैं।
लेख में उद्धृत विश्लेषकों का कहना है कि इस लेबलिंग संस्कृति से ध्रुवीकरण बढ़ता है और मुद्दा‑आधारित बातचीत का क्षय होता है। जटिल बहसों को सरल टैग में घटाकर जनता को वास्तविक चिंताओं की गहरी समझ से वंचित किया जाता है।
काउंटरव्यू संपादकीय नाम‑बोलियों से हटकर रचनात्मक संवाद की अपील करता है, और राजनेताओं व पत्रकारों से तथ्य और तर्क पर ध्यान देने का आग्रह करता है, न कि उकसाने वाले उपनामों पर।
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