📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Himanshu Arya Khowal
राजनीति
दिल्ली में विरोध मार्च के दौरान राहुल-प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में लिया
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 06 अक्टू. 2026, 12:16 PM
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140 से अधिक विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में संसद से सड़क तक ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग की नई जानकारियों के विरोध में मार्च किया। पुलिस ने कई नेताओं, जिनमें राहुल‑प्रियंका गांधी शामिल हैं, को हिरासत में लिया।
मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के 140 से अधिक सांसदों ने संसद से बाहर निकलकर नई दिल्ली की सड़कों पर ‘वोट चोरी’ और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़ी हालिया जानकारियों के खिलाफ मार्च किया। उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर दबाव बनाना था।
मार्च के दौरान पुलिस ने संसद भवन के निकट कई प्रमुख चौराहों पर कार्रवाई की। भीड़ नियंत्रण के उपाय अपनाते हुए अधिकारियों ने कई सांसदों को हिरासत में लिया, जिनमें वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शामिल हैं, जिन्हें संसद के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।
विरोधी दलों ने इस पुलिस कार्रवाई की निंदा की, इसे लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने का प्रयास कहा, जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और ट्रैफ़िक में बाधा रोकने के लिए गिरफ्तारियां की गईं। हिरासत में लिए गए सांसदों को बाद में पुलिस स्टेशन ले जाया गया, और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि वे इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देंगे।
यह घटना आगामी चुनावी माहौल में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच बढ़ती तनाव को दर्शाती है, जहाँ दोनों पक्ष अपने‑अपने अभियानों को जारी रखने का इरादा रखते हैं।
मार्च के दौरान पुलिस ने संसद भवन के निकट कई प्रमुख चौराहों पर कार्रवाई की। भीड़ नियंत्रण के उपाय अपनाते हुए अधिकारियों ने कई सांसदों को हिरासत में लिया, जिनमें वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शामिल हैं, जिन्हें संसद के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया।
विरोधी दलों ने इस पुलिस कार्रवाई की निंदा की, इसे लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने का प्रयास कहा, जबकि दिल्ली पुलिस ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और ट्रैफ़िक में बाधा रोकने के लिए गिरफ्तारियां की गईं। हिरासत में लिए गए सांसदों को बाद में पुलिस स्टेशन ले जाया गया, और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि वे इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देंगे।
यह घटना आगामी चुनावी माहौल में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच बढ़ती तनाव को दर्शाती है, जहाँ दोनों पक्ष अपने‑अपने अभियानों को जारी रखने का इरादा रखते हैं।