📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / George Hotelling from Plymouth, MI, United States
नौकरी
जम्मू‑कश्मीर के नौकरी‑आशावानों से 113 करोड़ एकत्र, पीडीपी विधायक ने कहा ‘दुःख से कमाई’
✍️ The Economic Times
🗓 04 अक्टू. 2026, 07:03 PM
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पीडीपी विधायक ने जम्मू‑कश्मीर के नौकरी‑आशावानों से एकत्रित 113 करोड़ रुपये को उनके दुःख से कमाई कहा है।
जम्मू‑कश्मीर के पीडीपी के वरिष्ठ विधायक ने राज्य में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों से एकत्रित 113 करोड़ रुपये की राशि की कड़ी निंदा की है। आर्थिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह बड़ी रकम नौकरी‑आशावानों से जुटाई गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह धन उन अभ्यर्थियों से इकट्ठा किया गया था जो सिविल सेवा और अन्य सार्वजनिक पदों के लिए प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। संग्रह की विधि या शामिल संस्थाओं के बारे में अभी तक कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पीडीपी विधायक ने इस प्रथा को "दुःख से कमाई" कहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे नौकरी‑आशावानों के आर्थिक बोझ को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सीमित रोजगार अवसरों वाले प्रदेश में ऐसे शोषण के खतरे बढ़ रहे हैं।
आर्थिक टाइम्स की इस खबर ने राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उजागर किया है और अभ्यर्थियों से जुड़ी मध्यस्थी प्रथाओं की जांच की मांग को बढ़ावा दिया है। अभी तक अधिकारियों ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह घटना जम्मू‑कश्मीर में नौकरी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और उम्मीदवारों को शोषण से बचाने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों पर चल रही बहस में नया आयाम जोड़ती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह धन उन अभ्यर्थियों से इकट्ठा किया गया था जो सिविल सेवा और अन्य सार्वजनिक पदों के लिए प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं। संग्रह की विधि या शामिल संस्थाओं के बारे में अभी तक कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पीडीपी विधायक ने इस प्रथा को "दुःख से कमाई" कहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे नौकरी‑आशावानों के आर्थिक बोझ को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सीमित रोजगार अवसरों वाले प्रदेश में ऐसे शोषण के खतरे बढ़ रहे हैं।
आर्थिक टाइम्स की इस खबर ने राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उजागर किया है और अभ्यर्थियों से जुड़ी मध्यस्थी प्रथाओं की जांच की मांग को बढ़ावा दिया है। अभी तक अधिकारियों ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह घटना जम्मू‑कश्मीर में नौकरी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और उम्मीदवारों को शोषण से बचाने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों पर चल रही बहस में नया आयाम जोड़ती है।