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18 अक्टू. 2026•
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धर्म

पटना सिटी में 1933से स्थापित हो रही है । मां दुर्गा कि प्रतिमा

✍️ रिपोर्टर: Awanish Kumar 🗓 18 अक्टू. 2026, 08:48 AM 👁 25
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पटना सिटी में वर्ष 1933से स्थापित हो रही है मां दुर्गा कि प्रतिमा। इस बात मधुबनी पेंटिंग से बना तोरण द्वार बना आर्कषण का केंद्र

पटना सिटी से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

पटना सिटी में 1933 से स्थापित हो रही मां दुर्गा की प्रतिमा, मधुबनी पेंटिंग के तोरण द्वार ने खींचा ध्यान
नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव ने की पूजा-अर्चना, मेयर सीता साहू, विधायक रत्नेश कुमार समेत कई गणमान्य लोग रहे मौजूद,


नवरात्र के पावन अवसर पर पटना सिटी के चैलीटाल स्थित श्री मनोरंजन दुर्गा समिति की ओर से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां वर्ष 1933 से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा चली आ रही है। लगभग नौ दशक से अधिक पुरानी यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी हुई है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और भक्त मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस वर्ष पूजा आयोजन में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। आर्ट कॉलेज के छात्रों द्वारा मधुबनी पेंटिंग से आकर्षक तोरण द्वार तैयार किया गया है। पारंपरिक मिथिला चित्रकला से सजे इस द्वार पर बिहार की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है। तोरण द्वार श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
शनिवार को नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव चैलीटाल स्थित पूजा स्थल पहुंचे। उन्होंने मां दुर्गा के दरबार में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और देशवासियों की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। इस दौरान पटना साहिब के विधायक रत्नेश कुमार भी उनके साथ मौजूद रहे।
पूजा समिति एवं प्रबंधक मंडल के सदस्यों ने राज्यपाल नंदकिशोर यादव का मां दुर्गा की चुनरी भेंट कर स्वागत किया। मौके पर पटना की मेयर सीता साहू, डिप्टी मेयर रश्मि चंद्रवंशी, पूर्व पार्षद प्रमोद गुप्ता, भारत अकादमी के अध्यक्ष नागेंद्र पांडे और समिति के सदस्य दीपू रंजन उर्फ राजू पप्पू मेहता समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आयोजन के दौरान धार्मिक श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना रहा। वर्ष 1933 से चली आ रही परंपरा के साथ मधुबनी पेंटिंग से सजे तोरण द्वार ने इस बार पूजा आयोजन को खास बना दिया है। समिति की ओर से आयोजित यह दुर्गापूजा धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को भी बढ़ावा दे रही है।
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