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पुर्व राजकीय अधिवक्ता का हुआ निधन
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दुल्हिनबाजारीप्रखंड के सदावह गांव के रहने वाले पुर्व राजकीय अधिवक्ताका हुआ निधन पूरे प्रखंड में शोक कि लहर
दुलहिनबाजार से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
पूर्व राजकीय अधिवक्ता सूर्यदेव यादव के आकस्मिक निधन से दुल्हिन बाजार में शोक की लहर।
दुल्हिन बाजार पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड के सदावेह गांव निवासी 72 वर्षीय सूर्यदेव यादव* को वुधवार देर शाम लगभग साढ़े आठ बजे पटना के एक निजी अस्पताल में निधन हो गई। वे सदावेह गांव से ही पढ़ाई लिखाई कर पटना गये । पटना लॉ कॉलेज से पढ़ाई कर दानापुर कोर्ट में पीपी बने, फिर पटना जिला के पीपी बने और पटना हाईकोर्ट में वकालत शुरू कर दी। बिहार झारखण्ड के संयुक्त रूप 1992 में हाईकोर्ट के राजकीय अधिवक्ता बनाये गए जहाँ ग्यारह वर्ष तक लगातार बने रहें। 2004 से अंतिम समय तक हाईकोर्ट के अपर महाधिवक्ता -9 के रूप में रहें। जहाँ मुख्य रूप से पथ निर्माण, स्वास्थ्य विभाग व आरटीआई कानून के रूप के सरकारी कार्य देखते थें। वहीं पिछले वर्ष हाईकोर्ट में हुए चुनाव में बिहार काउंसलिंग के सदस्य के रूप में अच्छे वोट से चुनाव जीते हुए थें।
प्रत्येक शनिवार सहित हाईकोर्ट में छूटी होने पर गांव आते थें। समाजिक कार्य से जुड़े हुए रहने का कारण क्षेत्र के लोगो से लगाव रहता था। निधन की खबर फैलते ही स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों में शोक की लहर दौड़ गई।
पूर्व राजकीय अधिवक्ता सूर्यदेव यादव के आकस्मिक निधन से दुल्हिन बाजार में शोक की लहर।
दुल्हिन बाजार पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड के सदावेह गांव निवासी 72 वर्षीय सूर्यदेव यादव* को वुधवार देर शाम लगभग साढ़े आठ बजे पटना के एक निजी अस्पताल में निधन हो गई। वे सदावेह गांव से ही पढ़ाई लिखाई कर पटना गये । पटना लॉ कॉलेज से पढ़ाई कर दानापुर कोर्ट में पीपी बने, फिर पटना जिला के पीपी बने और पटना हाईकोर्ट में वकालत शुरू कर दी। बिहार झारखण्ड के संयुक्त रूप 1992 में हाईकोर्ट के राजकीय अधिवक्ता बनाये गए जहाँ ग्यारह वर्ष तक लगातार बने रहें। 2004 से अंतिम समय तक हाईकोर्ट के अपर महाधिवक्ता -9 के रूप में रहें। जहाँ मुख्य रूप से पथ निर्माण, स्वास्थ्य विभाग व आरटीआई कानून के रूप के सरकारी कार्य देखते थें। वहीं पिछले वर्ष हाईकोर्ट में हुए चुनाव में बिहार काउंसलिंग के सदस्य के रूप में अच्छे वोट से चुनाव जीते हुए थें।
प्रत्येक शनिवार सहित हाईकोर्ट में छूटी होने पर गांव आते थें। समाजिक कार्य से जुड़े हुए रहने का कारण क्षेत्र के लोगो से लगाव रहता था। निधन की खबर फैलते ही स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों में शोक की लहर दौड़ गई।