स्थानीय
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पर उठे सवाल: अधूरी जानकारी और पोर्टल से रिकॉर्ड हटने का दावा
कुशलगढ़ नगरपालिका में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) से संबंधित जानकारी की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक सामाजिक कल्याण फाउंडेशन ने अधूरी जानकारी और रिकॉर्ड गायब होने के दावों के बाद प्रथम अपील दायर की है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) के क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर कुशलगढ़ नगरपालिका में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। Kalkivaram Social Welfare Foundation ने नगरपालिका द्वारा RTI (सूचना का अधिकार) के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी को अपूर्ण और असंतोषजनक बताते हुए प्रथम अपील दायर की है। फाउंडेशन ने योजना से संबंधित लाभार्थियों, स्वीकृत आवासों, भुगतान, निर्माण की स्थिति और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जानकारी मांगी थी, लेकिन प्राप्त जवाब में स्पष्टता का अभाव पाया गया।
फाउंडेशन के अनुसार, नगरपालिका कर्मचारी ने यह कहकर मामले को और उलझा दिया कि "पोर्टल से कुछ जानकारी हट गई है"। इस जवाब से असंतुष्ट होकर फाउंडेशन ने प्रथम अपील का सहारा लिया है। अब फाउंडेशन यह जानना चाहता है कि यदि सरकारी पोर्टल से जानकारी हटाई गई है, तो कब, किस प्रक्रिया के तहत, किस कारण से हटाई गई और इसका बैकअप कहां उपलब्ध है। केवल मौखिक जवाब को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है, बल्कि वास्तविक स्थिति सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट करने की मांग की गई है।
इस मामले को लेकर फाउंडेशन मुख्यमंत्री के नाम एक शिकायत भी दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। इसमें कुशलगढ़ में PMAY-U के रिकॉर्ड और क्रियान्वयन की विस्तृत जांच की मांग की जाएगी। जांच में लाभार्थियों, स्वीकृत आवासों, भुगतान, निर्माण की स्थिति और कार्यालयीन व ऑनलाइन रिकॉर्ड के बीच विसंगतियों का पता लगाने का आग्रह किया जाएगा। फाउंडेशन का कहना है कि यदि रिकॉर्ड उपलब्ध हैं तो उन्हें RTI के तहत प्रदान किया जाए, अन्यथा पोर्टल से जानकारी हटने के कारणों को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया जाए।
फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और यह स्पष्ट करना है कि पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ सही ढंग से पहुंच रहा है या नहीं। अब सभी की निगाहें नगरपालिका की प्रथम अपील पर होने वाली कार्रवाई और PMAY-U से संबंधित रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति पर टिकी हैं।
फाउंडेशन के अनुसार, नगरपालिका कर्मचारी ने यह कहकर मामले को और उलझा दिया कि "पोर्टल से कुछ जानकारी हट गई है"। इस जवाब से असंतुष्ट होकर फाउंडेशन ने प्रथम अपील का सहारा लिया है। अब फाउंडेशन यह जानना चाहता है कि यदि सरकारी पोर्टल से जानकारी हटाई गई है, तो कब, किस प्रक्रिया के तहत, किस कारण से हटाई गई और इसका बैकअप कहां उपलब्ध है। केवल मौखिक जवाब को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है, बल्कि वास्तविक स्थिति सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट करने की मांग की गई है।
इस मामले को लेकर फाउंडेशन मुख्यमंत्री के नाम एक शिकायत भी दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। इसमें कुशलगढ़ में PMAY-U के रिकॉर्ड और क्रियान्वयन की विस्तृत जांच की मांग की जाएगी। जांच में लाभार्थियों, स्वीकृत आवासों, भुगतान, निर्माण की स्थिति और कार्यालयीन व ऑनलाइन रिकॉर्ड के बीच विसंगतियों का पता लगाने का आग्रह किया जाएगा। फाउंडेशन का कहना है कि यदि रिकॉर्ड उपलब्ध हैं तो उन्हें RTI के तहत प्रदान किया जाए, अन्यथा पोर्टल से जानकारी हटने के कारणों को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया जाए।
फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और यह स्पष्ट करना है कि पात्र लाभार्थियों तक योजना का लाभ सही ढंग से पहुंच रहा है या नहीं। अब सभी की निगाहें नगरपालिका की प्रथम अपील पर होने वाली कार्रवाई और PMAY-U से संबंधित रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति पर टिकी हैं।