प्रतिदिन 60 ट्रेनें गुजरने से फाटक बार बार होता है बंद
*प्रतिदिन 60 ट्रेनें गुजरने से फाटक बार-बार होता है बंद*
*खैरथल फाटक पर थमती सांसें, ओवरब्रिज निर्माण का इंतजार*
खैरथल हीरालाल भूरानी
शहर में यातायात जाम एक गंभीर समस्या बन चुका है। दीपावली जैसे त्योहारों पर यह समस्या और बढ़ जाती है, जिससे आमजन को भारी परेशानी होती है।
अंबेडकर चौक से शनि मंदिर, अग्रसेन चौक, रेलवे फाटक से हेमू कॉलोनी चौक और अंडरब्रिज से 40 फुटा रोड तक वाहनों की लंबी कतारें देखी जाती है। रेलवे लाइन ने शहर को दो हिस्सों में बांट रखा है। स्थानीय लोगों के अनुसार चौबीस घंटे में लगभग 60 ट्रेनों की आवाजाही के कारण रेलवे फाटक बार-बार बंद कर दिया जाता है। स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों को विशेष परेशानी होती है। आपातकालीन सेवाओं के वाहन भी फंसने का जोखिम रहता है। शहर की सबसे बड़ी जरूरत रेलवे ओवरब्रिज है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसकी स्वीकृति मिली थी, लेकिन धरातल पर निर्माण आगे नहीं बढ़ सका।ठेकड़ा फाटक पर बायपास रोड बनाकर छोड़ दिया गया है, पर पटरियों पर पुल नहीं बन पाया। भाजपा सरकार के तीन वर्ष बीतने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि राजनीतिक खींचतान और विभागीय प्रक्रियाओं में ओवरब्रिज का मामला अटका है। शहरवासी सवाल कर रहे हैं कि स्वीकृति मिलने के बाद भी निर्माण में देरी क्यों हो रही है। उनकी मांग है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर जल्द से जल्द ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि जाम की समस्या से मुक्ति मिल सके।
*फोटो कैप्शन - फाटक बंद होने पर जाम में फंसी एम्बुलेंस।*
*खैरथल फाटक पर थमती सांसें, ओवरब्रिज निर्माण का इंतजार*
खैरथल हीरालाल भूरानी
शहर में यातायात जाम एक गंभीर समस्या बन चुका है। दीपावली जैसे त्योहारों पर यह समस्या और बढ़ जाती है, जिससे आमजन को भारी परेशानी होती है।
अंबेडकर चौक से शनि मंदिर, अग्रसेन चौक, रेलवे फाटक से हेमू कॉलोनी चौक और अंडरब्रिज से 40 फुटा रोड तक वाहनों की लंबी कतारें देखी जाती है। रेलवे लाइन ने शहर को दो हिस्सों में बांट रखा है। स्थानीय लोगों के अनुसार चौबीस घंटे में लगभग 60 ट्रेनों की आवाजाही के कारण रेलवे फाटक बार-बार बंद कर दिया जाता है। स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों को विशेष परेशानी होती है। आपातकालीन सेवाओं के वाहन भी फंसने का जोखिम रहता है। शहर की सबसे बड़ी जरूरत रेलवे ओवरब्रिज है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसकी स्वीकृति मिली थी, लेकिन धरातल पर निर्माण आगे नहीं बढ़ सका।ठेकड़ा फाटक पर बायपास रोड बनाकर छोड़ दिया गया है, पर पटरियों पर पुल नहीं बन पाया। भाजपा सरकार के तीन वर्ष बीतने के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि राजनीतिक खींचतान और विभागीय प्रक्रियाओं में ओवरब्रिज का मामला अटका है। शहरवासी सवाल कर रहे हैं कि स्वीकृति मिलने के बाद भी निर्माण में देरी क्यों हो रही है। उनकी मांग है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर जल्द से जल्द ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि जाम की समस्या से मुक्ति मिल सके।
*फोटो कैप्शन - फाटक बंद होने पर जाम में फंसी एम्बुलेंस।*