📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rashid Jorvee
राजनीति
अरुणाचल कांग्रेस ने कहा, सियांग जलविद्युत परियोजना के सामाजिक‑पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन करेगा पैनल
✍️ The Times of India
🗓 28 सित. 2026, 07:01 AM
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अरुणाचल कांग्रेस ने सियांग जलविद्युत परियोजना के सामाजिक‑पर्यावरणीय प्रभावों की जांच के लिए पैनल बनाते हुए घोषणा की।
अरुणाचल कांग्रेस ने सियांग जलविद्युत परियोजना के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों की जांच के लिए एक विशेष पैनल बनाने की घोषणा की है। पार्टी ने कहा कि यह पैनल स्थानीय समुदायों, जीवविविधता और नदी पारिस्थितिकी पर परियोजना के संभावित प्रभावों का मूल्यांकन करेगा।
बयान के अनुसार, पैनल में पर्यावरणीय NGOs, सामाजिक वैज्ञानिक और प्रभावित गाँवों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके निष्कर्ष राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे आवश्यक शमन उपायों पर विचार किया जा सकेगा।
सियांग परियोजना, ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी पर चल रहे कई जलविद्युत योजनाओं में से एक, पर्यावरणीय व्यवधान और स्वदेशी जनजातियों के विस्थापन को लेकर विवादित रही है। कांग्रेस का यह कदम आगामी राज्य चुनावों से पहले इन मुद्दों पर राजनीतिक ध्यान बढ़ाने का संकेत देता है।
अब तक राज्य अधिकारियों ने पैनल की संरचना या समय‑सीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह पहल परियोजना की स्वीकृति और मंजूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, जो कई सौ मेगावॉट बिजली उत्पादन करने की योजना रखती है।
स्थानीय कार्यकर्ता और सामाजिक समूहों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, और पारदर्शी एवं शीघ्र मूल्यांकन की मांग की है ताकि विकास से क्षेत्र की पारिस्थितिक संतुलन और सामाजिक ताने‑बाने को नुकसान न पहुँचे।
बयान के अनुसार, पैनल में पर्यावरणीय NGOs, सामाजिक वैज्ञानिक और प्रभावित गाँवों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके निष्कर्ष राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे, जिससे आवश्यक शमन उपायों पर विचार किया जा सकेगा।
सियांग परियोजना, ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी पर चल रहे कई जलविद्युत योजनाओं में से एक, पर्यावरणीय व्यवधान और स्वदेशी जनजातियों के विस्थापन को लेकर विवादित रही है। कांग्रेस का यह कदम आगामी राज्य चुनावों से पहले इन मुद्दों पर राजनीतिक ध्यान बढ़ाने का संकेत देता है।
अब तक राज्य अधिकारियों ने पैनल की संरचना या समय‑सीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह पहल परियोजना की स्वीकृति और मंजूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, जो कई सौ मेगावॉट बिजली उत्पादन करने की योजना रखती है।
स्थानीय कार्यकर्ता और सामाजिक समूहों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, और पारदर्शी एवं शीघ्र मूल्यांकन की मांग की है ताकि विकास से क्षेत्र की पारिस्थितिक संतुलन और सामाजिक ताने‑बाने को नुकसान न पहुँचे।