कृषि
पालीगंज के डीएवी स्कूल में 500 पौधों का रोपण; पर्यावरण प्रेमी सुमित और अमित कुमार ने बच्चों संग लिया संरक्षण का संकल्प
मानसून में पौधे लगाने से बढ़ती है जीवित रहने की दर, प्रधानाध्यापिका प्रभा निधी ने कहा- 'पौधों को बचाना ही असली पुण्य'
पटना जिले के पालीगंज में स्थित डीएवी (DAV) विद्यालय के प्रांगण में पर्यावरण प्रेमी सुमित कुमार एवं अमित कुमार के नेतृत्व में एक विशेष वृक्षारोपण और पौधा वितरण अभियान का आयोजन किया गया। इस पुनीत कार्य का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ समाज को प्रकृति संरक्षण का एक ठोस संदेश देना था। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कुल 500 फलदार और छायादार पौधे लगाए गए।
छात्रों ने उत्साह के साथ लिया गोद लेने का संकल्प
इस अभियान में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर और बेहद उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर उत्साहपूर्वक नारे लगाए और यह सामूहिक संकल्प लिया कि वे न केवल इन पौधों को रोपेंगे, बल्कि एक अभिभावक की तरह इनकी निरंतर देखभाल भी करेंगे। विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंधन समिति ने भी इस कार्य में सुमित कुमार का पूरा सहयोग किया और बच्चों को प्रकृति के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।
मानसून में वृक्षारोपण के पीछे का वैज्ञानिक कारण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण प्रेमी सुमित कुमार ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी और व्यावहारिक बात साझा की। उन्होंने बताया कि वे इस तरह के सघन अभियान को हर साल जानबूझकर केवल बारिश (मानसून) के मौसम में ही शुरू करते हैं। इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण यह है कि वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी उच्च स्तर पर होती है और मिट्टी को प्राकृतिक रूप से पर्याप्त पानी मिलता रहता है। इससे पौधों की जड़ें आसानी से मिट्टी में अपनी पकड़ बना लेती हैं और उनके जीवित रहने की दर (Survival Rate) लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक हो जाती है। इसके विपरीत, गर्मियों या अन्य मौसमों में लगाए गए अधिकांश पौधे पानी और सही देखभाल के अभाव में सूख जाते हैं।
पौधों को बचाकर पूर्ण वृक्ष बनाना असली चुनौती : प्रधानाध्यापिका
DAV पब्लिक स्कूल की प्रधानाध्यापिका प्रभा निधी ने बच्चों और उपस्थित लोगों को जीवन का एक बड़ा मंत्र देते हुए कहा, "वृक्षारोपण करना जितना पुण्य का कार्य है, उससे कहीं ज्यादा उस पौधे को बचाए रखना और उसे एक पूर्ण वृक्ष बनाना जरूरी है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि असली चुनौती और जिम्मेदारी पौधों को जानवरों से बचाने, समय पर खाद-पानी देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में है। यदि हम केवल पौधे लगाते रहे और उनकी देखभाल नहीं की, तो ऐसे अभियानों का कोई वास्तविक लाभ धरती को नहीं मिल पाएगा। इस विशेष अवसर पर शिक्षक उज्ज्वल कुमार, सोनी प्रसाद, विपिन कुमार, सुमित कुमार सिन्हा, मांडवी, परमजीत कुमार और विक्की जी सहित विद्यालय के कई सहायक लोग और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
छात्रों ने उत्साह के साथ लिया गोद लेने का संकल्प
इस अभियान में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर और बेहद उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर उत्साहपूर्वक नारे लगाए और यह सामूहिक संकल्प लिया कि वे न केवल इन पौधों को रोपेंगे, बल्कि एक अभिभावक की तरह इनकी निरंतर देखभाल भी करेंगे। विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंधन समिति ने भी इस कार्य में सुमित कुमार का पूरा सहयोग किया और बच्चों को प्रकृति के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया।
मानसून में वृक्षारोपण के पीछे का वैज्ञानिक कारण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण प्रेमी सुमित कुमार ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी और व्यावहारिक बात साझा की। उन्होंने बताया कि वे इस तरह के सघन अभियान को हर साल जानबूझकर केवल बारिश (मानसून) के मौसम में ही शुरू करते हैं। इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण यह है कि वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी उच्च स्तर पर होती है और मिट्टी को प्राकृतिक रूप से पर्याप्त पानी मिलता रहता है। इससे पौधों की जड़ें आसानी से मिट्टी में अपनी पकड़ बना लेती हैं और उनके जीवित रहने की दर (Survival Rate) लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक हो जाती है। इसके विपरीत, गर्मियों या अन्य मौसमों में लगाए गए अधिकांश पौधे पानी और सही देखभाल के अभाव में सूख जाते हैं।
पौधों को बचाकर पूर्ण वृक्ष बनाना असली चुनौती : प्रधानाध्यापिका
DAV पब्लिक स्कूल की प्रधानाध्यापिका प्रभा निधी ने बच्चों और उपस्थित लोगों को जीवन का एक बड़ा मंत्र देते हुए कहा, "वृक्षारोपण करना जितना पुण्य का कार्य है, उससे कहीं ज्यादा उस पौधे को बचाए रखना और उसे एक पूर्ण वृक्ष बनाना जरूरी है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि असली चुनौती और जिम्मेदारी पौधों को जानवरों से बचाने, समय पर खाद-पानी देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में है। यदि हम केवल पौधे लगाते रहे और उनकी देखभाल नहीं की, तो ऐसे अभियानों का कोई वास्तविक लाभ धरती को नहीं मिल पाएगा। इस विशेष अवसर पर शिक्षक उज्ज्वल कुमार, सोनी प्रसाद, विपिन कुमार, सुमित कुमार सिन्हा, मांडवी, परमजीत कुमार और विक्की जी सहित विद्यालय के कई सहायक लोग और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।