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पाबंदियों के पहले दिन दिल्ली में AQI 300 के ऊपर, बवाना में 429 का रिकॉर्ड
नई दिल्ली में पाबंदियों के पहले दिन ही वायु गुणवत्ता बिगड़कर AQI 300 के ऊपर पहुंच गई, 23 निगरानी केंद्रों में इस स्तर पर पहुंचा। बवाना में AQI 429 दर्ज, अन्य इलाकों में भी 300 से ऊपर।
पाबंदियों के लागू होने के पहले ही दिन दिल्ली की हवा ने गंभीर बिगड़ाव दिखाया, 57 निगरानी केंद्रों में से 23 पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के ऊपर पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में रही।
बवाना में सबसे खराब स्थिति दर्ज हुई, जहां AQI 429 का रिकॉर्ड बना। इसके अलावा जहांगीरपुरी में 385, रोहिणी में 360, पंजाबी बाग में 357, मुंडका में 346, आरके पुरम में 337, चांदनी चौक में 332, अलीपुर में 331, नरेला में 330 और विवेक विहार में 329 AQI दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने 21 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 245 था, जबकि रविवार को प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा। इससे पहले 12 जुलाई के बाद रविवार को सबसे अधिक प्रदूषित दिन दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, खराब वायु गुणवत्ता का असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर अधिक पड़ सकता है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। अब देखना होगा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लागू की गई पाबंदियां आने वाले दिनों में कितनी प्रभावी साबित होती हैं।
बवाना में सबसे खराब स्थिति दर्ज हुई, जहां AQI 429 का रिकॉर्ड बना। इसके अलावा जहांगीरपुरी में 385, रोहिणी में 360, पंजाबी बाग में 357, मुंडका में 346, आरके पुरम में 337, चांदनी चौक में 332, अलीपुर में 331, नरेला में 330 और विवेक विहार में 329 AQI दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने 21 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 245 था, जबकि रविवार को प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा। इससे पहले 12 जुलाई के बाद रविवार को सबसे अधिक प्रदूषित दिन दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, खराब वायु गुणवत्ता का असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर अधिक पड़ सकता है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। अब देखना होगा कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लागू की गई पाबंदियां आने वाले दिनों में कितनी प्रभावी साबित होती हैं।