📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Barry Loigman, M.D. (User:Bloigman)
स्थानीय
बिहार में नाव डुबने की घटनाओं में तीन साल में 52 से अधिक मौतें दर्ज
✍️ The Hindu
🗓 16 अक्टू. 2026, 10:15 AM
👁 19
सरकारी आँकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में बिहार में नाव डुबने की घटनाओं में 52 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिससे जलमार्ग सुरक्षा की चिंता बढ़ी है।
बिहार सरकार ने हाल ही में दुर्घटना आँकड़े संकलित कर यह उजागर किया है कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में नाव डुबने की घटनाओं में 52 से अधिक लोगों की जान गई है। अधिकांश मौतें गंगा तथा उसकी सहायक नदियों पर हुईं, जहाँ स्थानीय परिवहन के लिए यात्री और माल की नौकाएँ आम हैं।
अधिक लोडिंग, खराब रखरखाव और सुरक्षा उपकरणों की कमी को कारण बताया गया है। जबकि बचाव दल कई बार मौके पर पहुंचे, जीवन रक्षक जैकेट और प्रशिक्षित कर्मियों की अनुपस्थिति अक्सर समय पर मदद में बाधा बनती है।
राज्य के अधिकारी मौजूदा नौकायन नियमों को कड़ाई से लागू करने, नियमित सुरक्षा जाँच करने और यात्रियों एवं संचालकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने का वादा कर रहे हैं। यह आँकड़ा जलमार्गों पर सुरक्षा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
स्थानीय NGOs और सामुदायिक समूह भी सभी यात्री नौकाओं पर अनिवार्य लाइफ‑वेस्ट लगवाने और कड़ी निगरानी की मांग कर रहे हैं। सरकार की कार्रवाई को जनता की सुरक्षा के साथ नदी परिवहन की आर्थिक महत्ता को संतुलित करने के रूप में देखा जाएगा।
इन आँकड़ों का संकलन सार्वजनिक सुरक्षा के इस दोहराव वाले मुद्दे पर पारदर्शिता लाने का प्रयास है, जिससे नीति निर्माण में मदद मिलेगी और क्षेत्र में सुरक्षित नौकायन को प्रोत्साहन मिलेगा।
अधिक लोडिंग, खराब रखरखाव और सुरक्षा उपकरणों की कमी को कारण बताया गया है। जबकि बचाव दल कई बार मौके पर पहुंचे, जीवन रक्षक जैकेट और प्रशिक्षित कर्मियों की अनुपस्थिति अक्सर समय पर मदद में बाधा बनती है।
राज्य के अधिकारी मौजूदा नौकायन नियमों को कड़ाई से लागू करने, नियमित सुरक्षा जाँच करने और यात्रियों एवं संचालकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाने का वादा कर रहे हैं। यह आँकड़ा जलमार्गों पर सुरक्षा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
स्थानीय NGOs और सामुदायिक समूह भी सभी यात्री नौकाओं पर अनिवार्य लाइफ‑वेस्ट लगवाने और कड़ी निगरानी की मांग कर रहे हैं। सरकार की कार्रवाई को जनता की सुरक्षा के साथ नदी परिवहन की आर्थिक महत्ता को संतुलित करने के रूप में देखा जाएगा।
इन आँकड़ों का संकलन सार्वजनिक सुरक्षा के इस दोहराव वाले मुद्दे पर पारदर्शिता लाने का प्रयास है, जिससे नीति निर्माण में मदद मिलेगी और क्षेत्र में सुरक्षित नौकायन को प्रोत्साहन मिलेगा।