📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / LauraTurcu
बिज़नेस
जम्मू-कश्मीर में 10,000 से अधिक खनन वाहनों पर GPS ट्रैकिंग
✍️ Kashmir Life
🗓 24 सित. 2026, 05:17 AM
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने बताया कि 10,000 से अधिक खनन ट्रकों पर अब GPS उपकरण लगे हैं, जिससे संचालन की निगरानी होगी।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने बताया कि 10,000 से अधिक खनन वाहनों पर GPS ट्रैकिंग उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे क्षेत्र की खनन गतिविधियों की निगरानी सुदृढ़ होगी। राज्य के खनन विभाग ने यह आंकड़ा प्रमुख खनन स्थलों और पत्थर काटने वाले कारखानों में लागू होने की पुष्टि की है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अवैध खनन को रोकने, श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने और कर व रॉयल्टी की सही गणना सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। वास्तविक समय में वाहन की स्थिति देख कर अनधिकृत उत्खनन को तुरंत पहचाना जा सकेगा और पर्यावरणीय क्षति को कम किया जा सकेगा।
यह कार्यक्रम इस साल की शुरुआत में शुरू हुआ था, जिसमें खनन विभाग, राज्य परिवहन प्राधिकरण और निजी तकनीकी कंपनियों के बीच समन्वय शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रणाली में डीजल ट्रकों से लेकर छोटे लोडर तक सभी प्रकार के वाहनों को कवर किया गया है, और एक केंद्रीय कमांड सेंटर को लाइव डेटा भेजा जाता है।
प्रारम्भिक आँकड़े दर्शाते हैं कि GPS नेटवर्क राजस्व संग्रह में सुधार और भविष्य की नीतियों के लिये विश्वसनीय डेटाबेस प्रदान करेगा। गैर‑अनुपालन करने वाले ऑपरेटरों को जुर्माना और लाइसेंस रद्दीकरण जैसे दंड का सामना करना पड़ेगा।
यह पहल भारत के खनन क्षेत्र में डिजिटल निगरानी के सबसे बड़े प्रयोगों में से एक है, जो जम्मू‑कश्मीर में प्रौद्योगिकी‑आधारित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम दर्शाती है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अवैध खनन को रोकने, श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने और कर व रॉयल्टी की सही गणना सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। वास्तविक समय में वाहन की स्थिति देख कर अनधिकृत उत्खनन को तुरंत पहचाना जा सकेगा और पर्यावरणीय क्षति को कम किया जा सकेगा।
यह कार्यक्रम इस साल की शुरुआत में शुरू हुआ था, जिसमें खनन विभाग, राज्य परिवहन प्राधिकरण और निजी तकनीकी कंपनियों के बीच समन्वय शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रणाली में डीजल ट्रकों से लेकर छोटे लोडर तक सभी प्रकार के वाहनों को कवर किया गया है, और एक केंद्रीय कमांड सेंटर को लाइव डेटा भेजा जाता है।
प्रारम्भिक आँकड़े दर्शाते हैं कि GPS नेटवर्क राजस्व संग्रह में सुधार और भविष्य की नीतियों के लिये विश्वसनीय डेटाबेस प्रदान करेगा। गैर‑अनुपालन करने वाले ऑपरेटरों को जुर्माना और लाइसेंस रद्दीकरण जैसे दंड का सामना करना पड़ेगा।
यह पहल भारत के खनन क्षेत्र में डिजिटल निगरानी के सबसे बड़े प्रयोगों में से एक है, जो जम्मू‑कश्मीर में प्रौद्योगिकी‑आधारित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम दर्शाती है।