📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / U.S. Department of State from United States
राजनीति
चुनाव से पहले विरोध ने AAP सरकार पर की कड़ी आलोचना, पुलिस व नेताओं पर हुए हमले
✍️ India Today
🗓 19 सित. 2026, 06:02 AM
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आगामी चुनावों से पहले विपक्ष ने AAP सरकार की कड़ी निंदा की, पुलिस पर हुए हमले और नेताओं को निशाना बनाने की बात को उजागर किया।
दिल्ली के राजनीतिक माहौल में इस हफ्ते तनाव बढ़ गया है, क्योंकि विपक्षी पार्टियों ने आगामी राज्य चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की तीव्र आलोचना की है। भाजपा, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने प्रशासन पर कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफलता का आरोप लगाया, और हाल ही में हुई कई घटनाओं को इस असंतोष का प्रमाण बताया।
पिछले कुछ दिनों में, पुलिस कर्मियों ने नियमित ड्यूटी के दौरान हमले की रिपोर्ट की, और कई AAP कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें डराने-धमकाने के लिए निशाना बनाया गया। इन हमलों को विभिन्न शहर के हिस्सों में किया गया, जिन्हें विपक्ष ने वर्तमान सरकार के तहत सुरक्षा माहौल के बिगड़ने का संकेत माना।
AAP के अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अलग-अलग घटनाएँ प्रशासन की समग्र सुरक्षा रिकॉर्ड को नहीं दर्शातीं। उन्होंने विपक्ष से नीति चर्चा पर ध्यान केंद्रित करने और अपराधी मामलों को sensationalise करने से बचने का आग्रह किया। पार्टी ने अपने सदस्यों की सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी बुलाने की घोषणा की।
जैसे-जैसे चुनाव कैलेंडर नज़दीक आ रहा है, शासक पार्टी और विपक्ष दोनों ही अपने अभियानों को तेज करने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि हालिया हिंसा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है, जिससे आगामी हफ्तों में मतदाता की राय पर असर पड़ सकता है।
पिछले कुछ दिनों में, पुलिस कर्मियों ने नियमित ड्यूटी के दौरान हमले की रिपोर्ट की, और कई AAP कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें डराने-धमकाने के लिए निशाना बनाया गया। इन हमलों को विभिन्न शहर के हिस्सों में किया गया, जिन्हें विपक्ष ने वर्तमान सरकार के तहत सुरक्षा माहौल के बिगड़ने का संकेत माना।
AAP के अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अलग-अलग घटनाएँ प्रशासन की समग्र सुरक्षा रिकॉर्ड को नहीं दर्शातीं। उन्होंने विपक्ष से नीति चर्चा पर ध्यान केंद्रित करने और अपराधी मामलों को sensationalise करने से बचने का आग्रह किया। पार्टी ने अपने सदस्यों की सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के लिए वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी बुलाने की घोषणा की।
जैसे-जैसे चुनाव कैलेंडर नज़दीक आ रहा है, शासक पार्टी और विपक्ष दोनों ही अपने अभियानों को तेज करने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि हालिया हिंसा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है, जिससे आगामी हफ्तों में मतदाता की राय पर असर पड़ सकता है।