📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Press Information Bureau
राजनीति
ओक्रम इबोबी का कहना, केंद्र की इच्छा से 2‑3 महीने में मणिपुर में एनआरसी लागू हो सकता है
✍️ Imphal Times
🗓 21 अग. 2026, 03:18 AM
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मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओक्रम इबोबी ने कहा, केंद्र की ठोस इच्छा होने पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर दो‑तीन महीनों में लागू किया जा सकता है।
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओक्रम इबोबी ने इम्फाल टाइम्स को बताया कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को दो‑तीन महीने के भीतर पूरा किया जा सकता है, बशर्ते केंद्र सरकार इस दिशा में स्पष्ट इच्छा दिखाए। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था नागरिकता सत्यापन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को तेज़ी से लागू करने के लिए तैयार है, और शीघ्र समय‑सीमा से नागरिकता जांच से जुड़ी पुरानी चिंताओं का समाधान हो सकता है।
इबोबी ने यह बात दोहराते हुए कहा कि केंद्र की राजनीतिक इच्छा ही मुख्य कारक है। नई दिल्ली की ठोस प्रतिबद्धता के बिना प्रस्तावित समय‑सीमा पूरी नहीं हो पाएगी, उन्होंने कहा। यह बयान असम के बाद एनआरसी को अन्य राज्यों में लागू करने की व्यवहारिकता और राजनीतिक प्रभावों पर चल रहे बहस के बीच आया है।
वर्तमान में केंद्र सरकार ने इस समय‑सीमा पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज़ कार्यान्वयन से पहचान, प्रवास और पूर्वोत्तर क्षेत्र की चुनावी राजनीति पर चर्चा तेज़ हो सकती है। यह बयान राज्य की केंद्र सरकार के व्यापक नागरिकता एजेंडा के साथ तालमेल बिठाने की इच्छा को दर्शाता है, बशर्ते स्पष्ट निर्देश मिलें।
सिविल सोसाइटी समूह और विपक्षी दल इस प्रस्ताव की प्रक्रिया, न्यायसंगतता और सामाजिक प्रभाव को लेकर करीबी निगरानी करेंगे। आगे के कदम में मणिपुर के अधिकारियों और गृह मंत्रालय के बीच समन्वय करके कार्य योजना को अंतिम रूप देना शामिल होगा।
इबोबी ने यह बात दोहराते हुए कहा कि केंद्र की राजनीतिक इच्छा ही मुख्य कारक है। नई दिल्ली की ठोस प्रतिबद्धता के बिना प्रस्तावित समय‑सीमा पूरी नहीं हो पाएगी, उन्होंने कहा। यह बयान असम के बाद एनआरसी को अन्य राज्यों में लागू करने की व्यवहारिकता और राजनीतिक प्रभावों पर चल रहे बहस के बीच आया है।
वर्तमान में केंद्र सरकार ने इस समय‑सीमा पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज़ कार्यान्वयन से पहचान, प्रवास और पूर्वोत्तर क्षेत्र की चुनावी राजनीति पर चर्चा तेज़ हो सकती है। यह बयान राज्य की केंद्र सरकार के व्यापक नागरिकता एजेंडा के साथ तालमेल बिठाने की इच्छा को दर्शाता है, बशर्ते स्पष्ट निर्देश मिलें।
सिविल सोसाइटी समूह और विपक्षी दल इस प्रस्ताव की प्रक्रिया, न्यायसंगतता और सामाजिक प्रभाव को लेकर करीबी निगरानी करेंगे। आगे के कदम में मणिपुर के अधिकारियों और गृह मंत्रालय के बीच समन्वय करके कार्य योजना को अंतिम रूप देना शामिल होगा।