📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Choleswar
बिज़नेस
ऑडिशा के युवा ने कॉलेज में रॉकेट बनाया, अब 10,000 करोड़ रुपये के ड्रोन उद्यम की योजना
✍️ India Today
🗓 28 सित. 2026, 08:17 PM
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ऑडिशा के एक पूर्व कॉलेज छात्र, जिन्होंने रॉकेट बनाया, अब 10,000 करोड़ रुपये मूल्य का ड्रोन निर्माण कंपनी शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
इंजीनियरिंग पढ़ाई के दौरान सफलतापूर्वक रॉकेट बनाकर पहचान हासिल करने वाले इस उद्यमी ने अब तेज़ी से बढ़ते ड्रोन बाजार में कदम रखने का इरादा जताया है। उन्होंने 10,000 करोड़ रुपये मूल्य का ड्रोन निर्माण कंपनी स्थापित करने की योजना बताई, जिसका लक्ष्य कृषि, बुनियादी ढाँचा निगरानी और रक्षा जैसे क्षेत्रों को सेवाएँ प्रदान करना है।
योजना के तहत कंपनी वाणिज्यिक और विशेषीकृत दोनों प्रकार के ड्रोन विकसित करेगी, जिसमें स्वदेशी तकनीक और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को प्रमुखता दी जाएगी। संस्थापक प्रारंभिक रूप से अपने गृह राज्य ओडिशा में उत्पादन सुविधाएँ स्थापित करने की सोच रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय ड्रोन बाजार अगले पाँच वर्षों में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का आकार ले सकता है, जिससे यह प्रस्तावित पैमाना महत्वाकांक्षी परंतु संभव दिखता है। कॉलेज‑स्तर के रॉकेट में उनकी सफलता और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि को तकनीकी क्षमता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
वित्तीय स्रोतों में वेंचर कैपिटल, स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाली सरकारी योजनाएँ और निजी निवेशक शामिल होंगे। नियामक अनुमतियों के बाद अगले वर्ष की शुरुआत में पहली उत्पादन इकाई चालू होने की संभावना है।
इस परियोजना के सफल होने पर यह भारत की सबसे बड़ी स्वदेशी ड्रोन कंपनियों में से एक बन सकती है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।
योजना के तहत कंपनी वाणिज्यिक और विशेषीकृत दोनों प्रकार के ड्रोन विकसित करेगी, जिसमें स्वदेशी तकनीक और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को प्रमुखता दी जाएगी। संस्थापक प्रारंभिक रूप से अपने गृह राज्य ओडिशा में उत्पादन सुविधाएँ स्थापित करने की सोच रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय ड्रोन बाजार अगले पाँच वर्षों में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का आकार ले सकता है, जिससे यह प्रस्तावित पैमाना महत्वाकांक्षी परंतु संभव दिखता है। कॉलेज‑स्तर के रॉकेट में उनकी सफलता और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि को तकनीकी क्षमता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
वित्तीय स्रोतों में वेंचर कैपिटल, स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित करने वाली सरकारी योजनाएँ और निजी निवेशक शामिल होंगे। नियामक अनुमतियों के बाद अगले वर्ष की शुरुआत में पहली उत्पादन इकाई चालू होने की संभावना है।
इस परियोजना के सफल होने पर यह भारत की सबसे बड़ी स्वदेशी ड्रोन कंपनियों में से एक बन सकती है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।