📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep Chakraborty
अपराध
ओडिशा वैजिलेंस ने वरिष्ठ भूमि अधिग्रहण अधिकारी को 3.10 लाख रुपये के रिश्वत में फँसाया
✍️ Pragativadi
🗓 03 नव. 2026, 05:32 AM
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ओडिशा वैजिलेंस ब्यूरो ने एक वरिष्ठ भूमि अधिग्रहण अधिकारी को 3.10 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करने के बाद गिरफ्तार किया।
ओडिशा वैजिलेंस ब्यूरो ने एक गुप्त ऑपरेशन किया, जिसके दौरान राज्य के भूमि अधिग्रहण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को पकड़ा गया। यह स्टिंग कई दिनों तक चलती रही और भूमि सौदों से जुड़ी अवैध भुगतान को उजागर करने के उद्देश्य से की गई थी।
ऑफ़िसर को 3.10 लाख रुपये नकद रूप में एक लिफ़ाफ़े में स्वीकार करते हुए देखा गया, जिसे वह भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज़ या सुविधाजनक बनाने के बदले ले रहा था। भुगतान प्राप्त करने के बाद वैजिलेंस टीम ने तुरंत अधिकारी को हिरासत में ले लिया।
वैजिलेंस विभाग ने जारी किए गए बयान में कहा कि यह कार्रवाई सरकारी एजेंसियों में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी बताया कि एकत्रित सबूत उचित कानूनी प्राधिकरणों को सौंपे जाएंगे।
अब गिरफ्तार अधिकारी को भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम और संबंधित कानूनों के तहत अभियोजन का सामना करना पड़ेगा, जिसमें दोषी ठहराए जाने पर जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। इस मामले की आगे जांच चल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अन्य कोई अधिकारी शामिल था या नहीं।
यह घटना ओडिशा में चल रहे कई भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों में से एक है, जो भूमि अधिग्रहण और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की व्यापक पहल को दर्शाती है।
ऑफ़िसर को 3.10 लाख रुपये नकद रूप में एक लिफ़ाफ़े में स्वीकार करते हुए देखा गया, जिसे वह भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज़ या सुविधाजनक बनाने के बदले ले रहा था। भुगतान प्राप्त करने के बाद वैजिलेंस टीम ने तुरंत अधिकारी को हिरासत में ले लिया।
वैजिलेंस विभाग ने जारी किए गए बयान में कहा कि यह कार्रवाई सरकारी एजेंसियों में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी बताया कि एकत्रित सबूत उचित कानूनी प्राधिकरणों को सौंपे जाएंगे।
अब गिरफ्तार अधिकारी को भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम और संबंधित कानूनों के तहत अभियोजन का सामना करना पड़ेगा, जिसमें दोषी ठहराए जाने पर जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। इस मामले की आगे जांच चल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अन्य कोई अधिकारी शामिल था या नहीं।
यह घटना ओडिशा में चल रहे कई भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों में से एक है, जो भूमि अधिग्रहण और अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की व्यापक पहल को दर्शाती है।