📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhrasingh
राजनीति
ओडिशा विधानसभा ने 17वें सत्र की 7वीं बैठक 22 सितंबर से शुरू की
✍️ Pragativadi
🗓 04 सित. 2026, 02:02 AM
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17वें ओडिशा विधानसभा ने 22 सितंबर को अपनी 7वीं सत्र की शुरुआत की, जिसमें आगामी विधायी कार्यसूची निर्धारित की गई है।
भुवनेश्वर – 17वें ओडिशा विधानसभा ने 22 सितंबर को अपनी सातवीं सत्र की शुरुआत की, जिससे नई विधायी कार्यसूची का आरंभ हुआ। यह सत्र कई हफ्तों तक चलने की संभावना है और इसमें लंबित विधेयकों, बजट आवंटनों तथा राज्य को प्रभावित करने वाली नीतियों पर चर्चा होगी। विधायकों से कृषि सुधार, बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं जैसे प्रमुख मुद्दों पर बहस करने की अपेक्षा की जा रही है। सभापति ने सत्र की शुरुआत एक संक्षिप्त संबोधन से की, जिसमें प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया और सभी सदस्यों से पारस्परिक सहयोग की अपील की गई। इस सत्र में रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाले कई राज्य‑स्तरीय योजनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
सत्र का आरंभ राज्य के मुख्य मंत्री के कार्यालय द्वारा पहले जारी किए गए विस्तृत कैलेंडर के अनुसार हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि इस सत्र में सामान्य कार्यों के साथ‑साथ बाढ़ प्रबंधन और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं जैसी उभरती चुनौतियों पर विशेष चर्चा भी होगी। जैसे-जैसे विधानसभा कार्यवाही आगे बढ़ेगी, मीडिया संस्थाएँ लाइव अपडेट प्रदान करेंगे।
ओडिशा के विभिन्न हितधारक इस सत्र के परिणामों को निकटता से देख रहे हैं, क्योंकि यह राज्य के विकास दिशा को वर्ष के शेष हिस्से में प्रभावित करेगा। विपक्षी दल और नागरिक समाज समूह भी पारदर्शी बहस की मांग कर रहे हैं, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा सुनिश्चित हो सके।
सत्र का आरंभ राज्य के मुख्य मंत्री के कार्यालय द्वारा पहले जारी किए गए विस्तृत कैलेंडर के अनुसार हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि इस सत्र में सामान्य कार्यों के साथ‑साथ बाढ़ प्रबंधन और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं जैसी उभरती चुनौतियों पर विशेष चर्चा भी होगी। जैसे-जैसे विधानसभा कार्यवाही आगे बढ़ेगी, मीडिया संस्थाएँ लाइव अपडेट प्रदान करेंगे।
ओडिशा के विभिन्न हितधारक इस सत्र के परिणामों को निकटता से देख रहे हैं, क्योंकि यह राज्य के विकास दिशा को वर्ष के शेष हिस्से में प्रभावित करेगा। विपक्षी दल और नागरिक समाज समूह भी पारदर्शी बहस की मांग कर रहे हैं, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक चर्चा सुनिश्चित हो सके।