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30 Sep 2026•
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ओडिशा के नयागढ़ जिले में एक ऐसा देवी स्थल
Religion

ओडिशा के नयागढ़ जिले में एक ऐसा देवी स्थल

✍️ Reporter: Deepak Mahapatra 🗓 07 Sep 2026, 12:32 PM 👁 50
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ओडिशा के नयागढ़ जिले में एक ऐसा देवी स्थल, जहाँ आस्था सिर्फ मंदिर की चौखट तक सीमित नहीं है… बल्कि पहाड़ की एक रहस्यमयी गुफा तक जाती है।

कहा जाता है कि यहाँ माँ बैष्णवदेवी ने एक भक्त को सपने में बार-बार दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया था।

तीन बार आए उस स्वप्न के बाद शुरू हुई एक ऐसी यात्रा, जो आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुकी है।

नयागढ़ से करीब 9 किलोमीटर दूर जामुकोण इलाके में स्थित इस देवी धाम को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी आस्था है।

देखिए हमारी खास रिपोर्ट…

नयागढ़ जिले के जामुकोण गाँव का यह इलाका…

दूर से देखने पर सामान्य पहाड़ी क्षेत्र जैसा नजर आता है।

लेकिन जैसे-जैसे आप पहाड़ की ओर बढ़ते हैं, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की आस्था और इस जगह से जुड़ी मान्यताओं की कहानी सामने आती जाती है।

मगरबंध गाँव से होकर श्रद्धालु इस देवी धाम तक पहुँचते हैं।

और यहाँ पहुँचते ही सबसे पहले महसूस होती है—भक्ति, आस्था और विश्वास की एक अलग ही ऊर्जा।

स्थानीय मान्यता के अनुसार इसी पहाड़ी की एक गुफा में माँ बैष्णवदेवी का प्राकट्य हुआ।

सबसे खास बात यह है कि जिस गुफा को माँ का प्राकट्य स्थल माना जाता है, वहाँ फोटो और वीडियो बनाना प्रतिबंधित है।

यानी यह वह स्थान है, जहाँ श्रद्धालु कैमरा लेकर नहीं, बल्कि सिर झुकाकर पहुँचते हैं।

लेकिन आखिर इस मंदिर की शुरुआत कैसे हुई?

इसके पीछे जुड़ी है एक ऐसी कहानी, जिसे स्थानीय लोग आज भी माँ का आदेश मानते हैं।

बताया जाता है कि अजीत राउत नाम के एक युवक को माँ बैष्णवदेवी ने सपने में दर्शन दिए।

पहली बार जब ऐसा सपना आया तो उन्होंने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया।

उनका मानना था कि वे माँ की पूजा करते हैं, इसलिए शायद इसी वजह से उन्हें ऐसा सपना आया होगा।

लेकिन कुछ समय बाद…

उन्हें दूसरी बार भी माँ बैष्णवदेवी के दर्शन सपने में हुए।

इसके बावजूद उन्होंने इसे सामान्य ही माना।

लेकिन जब तीसरी बार माँ ने स्वप्न में दर्शन दिए, तो इस बार संदेश बिल्कुल स्पष्ट था।

स्थानीय मान्यता के अनुसार माँ ने उनसे कहा—

“मैंने तुम्हें धन-धान्य सब दिया, फिर भी तुम मेरे आदेश का पालन नहीं कर रहे हो। पहले जाओ, शुरुआत करो… बाकी सारे काम अपने आप हो जाएंगे।”

माँ के इस आदेश को अजीत राउत ने गंभीरता से लिया।

और यहीं से शुरू हुई मंदिर निर्माण की यात्रा।

कहते हैं, शुरुआत करना आसान नहीं था।

लगभग ढाई साल तक मंदिर को शुरू करने, जगह को विकसित करने और व्यवस्था बनाने की कोशिशें चलती रहीं।

और करीब ढाई साल बाद माँ के मंदिर की स्थापना का कार्य आगे बढ़ा।

बनारस से आए पंडितों की मौजूदगी में विधि-विधान के साथ मंदिर की स्थापना की गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार स्थापना के समय से जुड़े वही पंडित आज भी मंदिर में मुख्य पुजारी के रूप में सेवा दे रहे हैं।

लेकिन इस मंदिर की खासियत सिर्फ माँ बैष्णवदेवी तक ही सीमित नहीं है।

यहाँ माँ बैष्णवदेवी के साथ…

माँ काली, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती की भी पूजा-अर्चना की जाती है।

यानी शक्ति, समृद्धि और विद्या—तीनों स्वरूपों की आराधना यहाँ एक साथ देखने को मिलती है।

इसी वजह से दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान विशेष आस्था का केंद्र बन गया है।

कोई माँ से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करता है…

तो कोई अपने परिवार की खुशहाली के लिए यहाँ माथा टेकता है।

कोई माँ काली के चरणों में अपनी मनोकामना रखता है…

तो कोई माँ सरस्वती से ज्ञान और माँ लक्ष्मी से समृद्धि का आशीर्वाद मांगता है।

और सबसे खास बात—यहाँ रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं।

मगरबंध गाँव से होकर पहाड़ी रास्ते की ओर बढ़ते श्रद्धालु…

हाथों में पूजा की सामग्री…

जुबां पर माँ का नाम…

और मन में सिर्फ एक ही विश्वास—

माँ के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता।

हालाँकि माँ के प्राकट्य से जुड़ी यह पूरी कहानी स्थानीय आस्था और मान्यता पर आधारित है, लेकिन इस स्थान पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विश्वास ही सबसे बड़ा प्रमाण है।

किसी के लिए यह सिर्फ एक मंदिर है…

लेकिन किसी के लिए यह वह स्थान है, जहाँ माँ ने स्वयं बुलाया।

किसी के लिए यह सिर्फ एक पहाड़ी गुफा है…

लेकिन भक्तों के लिए यही माँ का पवित्र प्राकट्य स्थल है।

और शायद यही वजह है कि नयागढ़ के इस छोटे से इलाके में स्थित माँ बैष्णवदेवी का यह धाम लगातार श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहा है।

“नयागढ़ के जामुकोण की इस पहाड़ी पर माँ बैष्णवदेवी को लेकर भक्तों की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है। स्वप्न में मिले कथित आदेश से शुरू हुई मंदिर निर्माण की यह कहानी आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुकी है। माँ बैष्णवदेवी के साथ माँ काली, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती की पूजा इस धाम को और भी विशेष बनाती है। पहाड़ की गुफा में स्थित माँ के प्राकट्य स्थल को लेकर भक्तों में गहरी श्रद्धा है और यही आस्था हर दिन लोगों को यहाँ खींचकर ला रही है।
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