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Ntpc Rithwik ट्रांसपोर्टिंग का मनमानी इतना बढ़ गया है अब बच्चों बच्चियों को नहीं छोड़ रहा है
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Ntpc Rithwik ट्रांसपोर्टिंग का मनमानी इतना बढ़ गया है अब बच्चों बच्चियों को नहीं छोड़ रहा है
केरेडारी Ntpc Rithwik ट्रांसपोर्टिंग का मनमानी मनमाने रवैये से बाज नहीं आ रही है बच्चे बच्चियों का जान का कोई गारंटी नहीं जो समय दिया गया उसके पालन न करते हुए ट्रांसपोर्टिंग किया जा रहा है
संवाददाता, निरंजन कुमार साव
केरेडारी (हजारीबाग)
प्रखंड क्षेत्र के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, जोरदाग के स्कूली बच्चों और शिक्षकों को रोज जान जोखिम में डालकर स्कूल आना पड़ रहा है। कंपनी और स्थानीय प्रशासन के बीच स्कूली आवाजाही के समय भारी वाहनों के परिचालन को लेकर जो नियम तय किए गए थे, उनका खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। तय समय-सीमा के बावजूद हाईवे पर भारी वाहनों का बेधड़क परिचालन जारी है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
क्या है तय नियम और मौजूदा स्थिति?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में संचालित कंपनी द्वारा मौखिक रूप से यह समय-सारणी तय की गई थी कि सुबह 8:30 बजे से 9:30 बजे तक और दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक स्कूल आने-जाने के समयानुसार हाईवे पर भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा।
लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। इस नियम का पालन धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है। सुबह ठीक इसी समयावधि (लगभग 9:45 बजे) में जब राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोरदार के छोटे-छोटे बच्चे हाईवे रोड को पार कर पैदल स्कूल पहुंचते हैं, तब उसी दौरान भारी वाहन तेजी से गुजरते हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना बयान
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब इस गंभीर मामले को लेकर कंपनी के जिम्मेदार पदाधिकारियों से बात की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और तानाशाही भरा रहा। पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा— "जो करना है कर लो, गाड़ी ऐसे ही जाएगी और इसी समय बंद होगी।" कंपनी प्रबंधन का यह रुख क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और आम जनता में इसे लेकर भारी आक्रोश है।
बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा खतरे में
समय पर वाहनों का परिचालन बंद न होने के कारण रोज सुबह और छुट्टी के समय बच्चों तथा शिक्षकों को सड़क पार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बच्चों के अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन ने चिंता जताई है कि यदि समय रहते इसपर लगाम नहीं लगाई गई, तो कभी भी कोई अनहोनी घट सकती है।
ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस से मांग की है कि कंपनी की मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तय समय पर भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती से प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए।
संवाददाता, निरंजन कुमार साव
केरेडारी (हजारीबाग)
प्रखंड क्षेत्र के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, जोरदाग के स्कूली बच्चों और शिक्षकों को रोज जान जोखिम में डालकर स्कूल आना पड़ रहा है। कंपनी और स्थानीय प्रशासन के बीच स्कूली आवाजाही के समय भारी वाहनों के परिचालन को लेकर जो नियम तय किए गए थे, उनका खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। तय समय-सीमा के बावजूद हाईवे पर भारी वाहनों का बेधड़क परिचालन जारी है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
क्या है तय नियम और मौजूदा स्थिति?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में संचालित कंपनी द्वारा मौखिक रूप से यह समय-सारणी तय की गई थी कि सुबह 8:30 बजे से 9:30 बजे तक और दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे तक स्कूल आने-जाने के समयानुसार हाईवे पर भारी वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा।
लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। इस नियम का पालन धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है। सुबह ठीक इसी समयावधि (लगभग 9:45 बजे) में जब राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय जोरदार के छोटे-छोटे बच्चे हाईवे रोड को पार कर पैदल स्कूल पहुंचते हैं, तब उसी दौरान भारी वाहन तेजी से गुजरते हैं।
जिम्मेदार अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना बयान
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब इस गंभीर मामले को लेकर कंपनी के जिम्मेदार पदाधिकारियों से बात की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और तानाशाही भरा रहा। पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा— "जो करना है कर लो, गाड़ी ऐसे ही जाएगी और इसी समय बंद होगी।" कंपनी प्रबंधन का यह रुख क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और आम जनता में इसे लेकर भारी आक्रोश है।
बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा खतरे में
समय पर वाहनों का परिचालन बंद न होने के कारण रोज सुबह और छुट्टी के समय बच्चों तथा शिक्षकों को सड़क पार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बच्चों के अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन ने चिंता जताई है कि यदि समय रहते इसपर लगाम नहीं लगाई गई, तो कभी भी कोई अनहोनी घट सकती है।
ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों ने जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस से मांग की है कि कंपनी की मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तय समय पर भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती से प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए।