📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
स्थानीय
एनएसएलएसए ने नागालैंड में तीसरा त्रैमासिक राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित किया
✍️ DIPR Nagaland
🗓 15 सित. 2026, 02:17 AM
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राष्ट्रीय कानूनी सेवा समाज (NSLSA) ने राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सूचना के अनुसार, नागालैंड में तीसरा त्रैमासिक राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित किया।
नागालैंड के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय कानूनी सेवा समाज (NSLSA) ने राज्य भर में अपना तीसरा त्रैमासिक राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित किया है। लोक अदालत, जो नागरिक व वाणिज्यिक विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटारे के लिए स्थापित एक वैधानिक मंच है, का उद्देश्य मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना और मामलों की निपटान प्रक्रिया को तेज़ करना है।
यह कार्यक्रम कई जिलों में फैला, जहाँ मुकदमेबाज़ों को सामान्य अदालत की औपचारिकताओं के बिना कानूनी विशेषज्ञों और मजिस्ट्रेटों के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करने का अवसर मिला। परिवारिक विवादों से लेकर संपत्ति संबंधी मुद्दों तक के मामलों को सुलझाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया गया, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कमी लाने की आशा है।
NSLSA के अधिकारियों ने कहा कि त्रैमासिक लोक अदालत नागालैंड में न्याय तक पहुँच को बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, विशेषकर हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए। विभाग ने इस वर्ष ऐसे और कार्यक्रमों को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यह पहल वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों पर राज्य के फोकस को दर्शाती है, जो तेज़ और किफ़ायती न्याय प्रदान करने के राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप है।
घोषणा के समय मामलों की संख्या या विशिष्ट परिणामों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई।
यह कार्यक्रम कई जिलों में फैला, जहाँ मुकदमेबाज़ों को सामान्य अदालत की औपचारिकताओं के बिना कानूनी विशेषज्ञों और मजिस्ट्रेटों के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत करने का अवसर मिला। परिवारिक विवादों से लेकर संपत्ति संबंधी मुद्दों तक के मामलों को सुलझाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया गया, जिससे लंबित मामलों की संख्या में कमी लाने की आशा है।
NSLSA के अधिकारियों ने कहा कि त्रैमासिक लोक अदालत नागालैंड में न्याय तक पहुँच को बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है, विशेषकर हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए। विभाग ने इस वर्ष ऐसे और कार्यक्रमों को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
यह पहल वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों पर राज्य के फोकस को दर्शाती है, जो तेज़ और किफ़ायती न्याय प्रदान करने के राष्ट्रीय नीतियों के अनुरूप है।
घोषणा के समय मामलों की संख्या या विशिष्ट परिणामों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी गई।