देश
North Bengal all gorkha community Demand separate state Gorkhaland
Separate state Demand
*प्रेस विज्ञप्ति / समाचार आलेख*
*स्थान: दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल*
*विषय: 108 साल पुरानी गोरखालैंड की मांग पर स्थायी राजनीतिक समाधान न होने से जनता में निराशा*
दार्जिलिंग, तराई और डूआर्स सहित समस्त उत्तर बंगाल की 108 साल पुरानी मांग - अलग राज्य गोरखालैंड - को लेकर आज भी स्थायी समाधान नहीं हो पाया है, जिससे आम जनता में गहरी निराशा है।
भाजपा सरकार ने अपने संकल्प पत्र में स्पष्ट रूप से वादा किया था कि गोरखालैंड की मांग का *Permanent Political Solution* किया जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने स्वयं कहा था - "गोरखाओं का सपना मेरा सपना है"। लेकिन आज तक उस वचन को पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण दार्जिलिंग, तराई, डूआर्स और समस्त उत्तर बंगाल की जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
यदि अलग राज्य गोरखालैंड का निर्माण होता है तो इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। अतीत में देखा जाए तो तृणमूल कांग्रेस से पहले वामपंथी सरकारों ने भी उत्तर बंगाल के विकास के लिए कुछ नहीं किया। और वर्तमान टीएमसी सरकार ने तो उत्तर बंगाल को पूरी तरह से खंडहर बना कर रख दिया है।
वर्तमान में केंद्र में भाजपा सरकार विकास की कोशिश कर रही है, मगर यहाँ की आम जनता की जो दीर्घकालीन आकांक्षा और 108 साल पुरानी मांग है, जिस पर भाजपा ने वादा किया था, उस पर आज तक कोई समाधान नहीं निकला है। इसी कारण सम्पूर्ण तराई, डूआर्स और दार्जिलिंग वासी निराश और आक्रोशित हैं।
सरकार से मांग है कि अपने संकल्प पत्र में किए गए वादे को जल्द से जल्द पूरा करे और गोरखालैंड राज्य की मांग पर स्थायी राजनीतिक समाधान निकाले।
*स्थान: दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल*
*विषय: 108 साल पुरानी गोरखालैंड की मांग पर स्थायी राजनीतिक समाधान न होने से जनता में निराशा*
दार्जिलिंग, तराई और डूआर्स सहित समस्त उत्तर बंगाल की 108 साल पुरानी मांग - अलग राज्य गोरखालैंड - को लेकर आज भी स्थायी समाधान नहीं हो पाया है, जिससे आम जनता में गहरी निराशा है।
भाजपा सरकार ने अपने संकल्प पत्र में स्पष्ट रूप से वादा किया था कि गोरखालैंड की मांग का *Permanent Political Solution* किया जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने स्वयं कहा था - "गोरखाओं का सपना मेरा सपना है"। लेकिन आज तक उस वचन को पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण दार्जिलिंग, तराई, डूआर्स और समस्त उत्तर बंगाल की जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
यदि अलग राज्य गोरखालैंड का निर्माण होता है तो इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। अतीत में देखा जाए तो तृणमूल कांग्रेस से पहले वामपंथी सरकारों ने भी उत्तर बंगाल के विकास के लिए कुछ नहीं किया। और वर्तमान टीएमसी सरकार ने तो उत्तर बंगाल को पूरी तरह से खंडहर बना कर रख दिया है।
वर्तमान में केंद्र में भाजपा सरकार विकास की कोशिश कर रही है, मगर यहाँ की आम जनता की जो दीर्घकालीन आकांक्षा और 108 साल पुरानी मांग है, जिस पर भाजपा ने वादा किया था, उस पर आज तक कोई समाधान नहीं निकला है। इसी कारण सम्पूर्ण तराई, डूआर्स और दार्जिलिंग वासी निराश और आक्रोशित हैं।
सरकार से मांग है कि अपने संकल्प पत्र में किए गए वादे को जल्द से जल्द पूरा करे और गोरखालैंड राज्य की मांग पर स्थायी राजनीतिक समाधान निकाले।