📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Health and Family Welfare
शिक्षा
एनएमसी ने 2026 के लिए 3,656 MS ऑर्थोपेडिक्स सीटें तय कीं, कर्नाटक को 551 सीटें
✍️ Medical Dialogues
🗓 08 अक्टू. 2026, 01:18 PM
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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने 2026 के लिए सीट मैट्रिक्स जारी किया, जिसमें MS ऑर्थोपेडिक्स के लिए 3,656 सीटें तय की गईं, जिनमें कर्नाटक को 551 सीटें मिलीं।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने 2026 शैक्षणिक वर्ष के लिए सीट मैट्रिक्स प्रकाशित किया है, जिसमें पूरे भारत में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों का वितरण दर्शाया गया है। ऑर्थोपेडिक्स के लिए कुल 3,656 सीटें निर्धारित की गई हैं। कर्नाटक, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़े राज्यों में से एक, इन सीटों में से 551 प्राप्त करेगा।
यह आवंटन क्षेत्रीय मांग और क्षमता को संतुलित करने के लिए एनएमसी के प्रयास को दर्शाता है, जिससे सभी राज्यों के छात्रों को विशेष प्रशिक्षण के लिए समान अवसर मिल सके। ऑर्थोपेडिक्स सीटें 12‑महीने के एमएस कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो इस क्षेत्र में कई क्लिनिकल और शोध भूमिकाओं के लिए आवश्यक है।
2026 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को एनएमसी द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा, जिसमें न्यूनतम NEET‑PG अंक और निर्धारित आरक्षण नियमों का पालन शामिल है। यह घोषणा आवेदकों को अपने आवेदन और पसंदीदा संस्थानों के चयन में मार्गदर्शन करेगी।
एनएमसी का सीट मैट्रिक्स वार्षिक रूप से जारी किया जाता है और यह चिकित्सा कॉलेजों, छात्रों और नीति निर्माताओं के लिए संसाधनों को शैक्षिक आवश्यकताओं के साथ संरेखित करने के लिए एक प्रमुख संदर्भ है।
यह आवंटन क्षेत्रीय मांग और क्षमता को संतुलित करने के लिए एनएमसी के प्रयास को दर्शाता है, जिससे सभी राज्यों के छात्रों को विशेष प्रशिक्षण के लिए समान अवसर मिल सके। ऑर्थोपेडिक्स सीटें 12‑महीने के एमएस कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो इस क्षेत्र में कई क्लिनिकल और शोध भूमिकाओं के लिए आवश्यक है।
2026 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को एनएमसी द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा, जिसमें न्यूनतम NEET‑PG अंक और निर्धारित आरक्षण नियमों का पालन शामिल है। यह घोषणा आवेदकों को अपने आवेदन और पसंदीदा संस्थानों के चयन में मार्गदर्शन करेगी।
एनएमसी का सीट मैट्रिक्स वार्षिक रूप से जारी किया जाता है और यह चिकित्सा कॉलेजों, छात्रों और नीति निर्माताओं के लिए संसाधनों को शैक्षिक आवश्यकताओं के साथ संरेखित करने के लिए एक प्रमुख संदर्भ है।