📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Themastaadmi
स्वास्थ्य
एनजीटी रिपोर्ट ने उजागर किया बैगा आदिवासी बच्चों में खसरा महामारी के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 19 सित. 2026, 04:01 PM
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एनजीटी रिपोर्ट ने बैगा आदिवासी बच्चों में खसरा महामारी और मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर किया है, जिसमें 64 सैंपल में 25 खसरा पॉजिटिव और 12 मामलों में खसरा‑मलेरिया दोनों पाया गया।
राष्ट्रीय गाइनकोलॉजी और ट्रांसप्लांटेशन (एनजीटी) ने बैगहाट जिले में बैगा आदिवासी बच्चों में हालिया खसरा महामारी के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर कमियों का खुलासा करते हुए एक रिपोर्ट जारी की है।
इस अध्ययन में 196 रिपोर्टेड मामलों में से 156 बच्चे दस वर्ष से कम आयु के थे। 64 सैंपल के लैब परीक्षण में 25 में खसरा पॉजिटिव पाया गया और 12 मामलों में खसरा‑मलेरिया दोनों की सह-इन्फेक्शन पाई गई।
एनजीटी के अधिकारियों ने बताया कि सह‑इन्फेक्शन की यह उच्च दर निदान में देरी और क्षेत्र में उपचार सुविधाओं की कमी को दर्शाती है। रिपोर्ट में टीकाकरण अभियान को सुदृढ़ करने, निदान क्षमता बढ़ाने और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने निष्कर्षों को स्वीकार किया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का वादा किया है।
यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब राज्य में संक्रामक रोगों के मामलों में वृद्धि हो रही है, जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
इस अध्ययन में 196 रिपोर्टेड मामलों में से 156 बच्चे दस वर्ष से कम आयु के थे। 64 सैंपल के लैब परीक्षण में 25 में खसरा पॉजिटिव पाया गया और 12 मामलों में खसरा‑मलेरिया दोनों की सह-इन्फेक्शन पाई गई।
एनजीटी के अधिकारियों ने बताया कि सह‑इन्फेक्शन की यह उच्च दर निदान में देरी और क्षेत्र में उपचार सुविधाओं की कमी को दर्शाती है। रिपोर्ट में टीकाकरण अभियान को सुदृढ़ करने, निदान क्षमता बढ़ाने और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने निष्कर्षों को स्वीकार किया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का वादा किया है।
यह रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब राज्य में संक्रामक रोगों के मामलों में वृद्धि हो रही है, जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।