📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vanlalsiammawil, Remruatpuii, V.L. Malsawmhriatzua
विज्ञान
मिज़ोरम में पहचाना गया नया मेंढक, दशकों की गलत पहचान समाप्त
✍️ The Times of India
🗓 16 सित. 2026, 02:01 AM
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वैज्ञानिकों ने मिज़ोरम में कई सालों से गलत समझे जा रहे मेंढक की सही पहचान कर इसे एक अलग प्रजाति के रूप में स्थापित किया।
मिज़ोरम के उभयचर संग्रहों की जांच करने वाले शोधकर्ताओं ने घोषणा की है कि पहले एक समान प्रजाति के साथ मिलाकर देखा गया मेंढक वास्तव में एक अलग वर्ग है। विस्तृत रूपरचनात्मक तुलना और डीएनए अनुक्रमण ने विशिष्ट लक्षणों की पुष्टि की, जिससे इसे नई वैज्ञानिक नाम के तहत औपचारिक रूप से पुनः वर्णित किया गया।
हेरपेटोलॉजिस्टों ने रंगरूप और आवाज़ के सूक्ष्म अंतर को नोट किया था, जिससे पुनः मूल्यांकन की आवश्यकता उत्पन्न हुई। संग्रहालय के नमूनों और क्षेत्रीय अवलोकनों को दोबारा देख कर टीम ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाए और दशकों पुरानी गलत पहचान को उलट दिया।
इस मेंढक को अलग प्रजाति के रूप में मान्यता मिलने से क्षेत्रीय जैव विविधता मूल्यांकन और संरक्षण योजना पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह उत्तर‑पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों की समृद्ध, परंतु अभी तक पूरी तरह अध्ययन न की गई उभयचर जीव विविधता को उजागर करता है और आगे के वर्गीकरण अनुसंधान की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
हेरपेटोलॉजिस्टों ने रंगरूप और आवाज़ के सूक्ष्म अंतर को नोट किया था, जिससे पुनः मूल्यांकन की आवश्यकता उत्पन्न हुई। संग्रहालय के नमूनों और क्षेत्रीय अवलोकनों को दोबारा देख कर टीम ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाए और दशकों पुरानी गलत पहचान को उलट दिया।
इस मेंढक को अलग प्रजाति के रूप में मान्यता मिलने से क्षेत्रीय जैव विविधता मूल्यांकन और संरक्षण योजना पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह उत्तर‑पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों की समृद्ध, परंतु अभी तक पूरी तरह अध्ययन न की गई उभयचर जीव विविधता को उजागर करता है और आगे के वर्गीकरण अनुसंधान की आवश्यकता को रेखांकित करता है।