📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / It work of Trilok Singh Artist for Punjabi Encyclo
राजनीति
अकाली राजनीति में नए खिलाड़ी वारिस पंजाब दे और पुनर सुरजीत ने 2027 के चुनावों से पहले तेज़ किया अभियान
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 29 अग. 2026, 12:39 PM
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2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले, उभरते राजनीतिक दल वारिस पंजाब दे और पुनर सुरजीत ने अपना अभियान तेज़ किया, जिससे अकाली राजनीति में नई गतिशीलता आई है।
जालंधर, पंजाब – 2027 के विधानसभा चुनावों के निकट आते ही अकाली राजनीति के दो नए दलों ने अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। वारिस पंजाब दे, जो हाल ही में स्थापित हुआ है, ने प्रमुख क्षेत्रों में रैलियों और घर‑घर जाकर जनसम्पर्क अभियान शुरू किया है, जिसमें क्षेत्रीय विकास और युवा सशक्तिकरण पर ज़ोर दिया गया है।
इसी समय, पुनर सुरजीत समूह, जिसके प्रमुख पूर्व पार्टी कार्यकर्ता सुरजीत सिंह हैं, ने पारंपरिक अकाली ठिकानों को लक्षित करते हुए एक केंद्रित अभियान शुरू किया है। उनका संदेश मूल सिख मूल्यों को पुनर्जीवित करने और आधुनिक शासन एजेंडा पेश करने पर आधारित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नए खिलाड़ियों के उभरने से पारंपरिक अकाली वोट बैंक में विभाजन हो सकता है, जिससे स्थापित पार्टियों को अपनी रणनीति पुनः विचारनी पड़ेगी। दोनों समूह कई सीटों में उम्मीदवार पेश करने का वादा कर रहे हैं, हालांकि अंतिम सूची अभी तय नहीं हुई है।
यह तेज़ होता अभियान पंजाब की प्रमुख राजनीतिक धारा में आंतरिक प्रतिस्पर्धा के बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जहाँ विभिन्न हितधारक आगामी चुनावों से पहले प्रभाव स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं।
इसी समय, पुनर सुरजीत समूह, जिसके प्रमुख पूर्व पार्टी कार्यकर्ता सुरजीत सिंह हैं, ने पारंपरिक अकाली ठिकानों को लक्षित करते हुए एक केंद्रित अभियान शुरू किया है। उनका संदेश मूल सिख मूल्यों को पुनर्जीवित करने और आधुनिक शासन एजेंडा पेश करने पर आधारित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नए खिलाड़ियों के उभरने से पारंपरिक अकाली वोट बैंक में विभाजन हो सकता है, जिससे स्थापित पार्टियों को अपनी रणनीति पुनः विचारनी पड़ेगी। दोनों समूह कई सीटों में उम्मीदवार पेश करने का वादा कर रहे हैं, हालांकि अंतिम सूची अभी तय नहीं हुई है।
यह तेज़ होता अभियान पंजाब की प्रमुख राजनीतिक धारा में आंतरिक प्रतिस्पर्धा के बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जहाँ विभिन्न हितधारक आगामी चुनावों से पहले प्रभाव स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं।