📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ABP MAJHA
अपराध
नेहा बोरा ने CJP विरोध में कोई भूमिका नहीं बताई, दिल्ली एचसी में शांति बंधन के लिए याचिका दायर
✍️ India Today
🗓 23 अक्टू. 2026, 01:16 AM
👁 23
पूर्व कार्यकर्ता नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के विरोध में बुलाए गए प्रदर्शन में कोई भूमिका नहीं निभाई और हिरासत के बाद शांति बंधन की मांग की।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई की, जिन्हें इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (CJP) के विरोध में बुलाए गए प्रदर्शन से जुड़ी एक कॉल के कारण हिरासत में लिया गया था। बोरा ने कहा कि उन्होंने इस प्रदर्शन का आयोजन या प्रचार करने में कोई भागीदारी नहीं की और उनकी गिरफ्तारी अनुचित थी।
कोर्ट ने शांति बंधन के आवेदन की जांच की, जो एक कानूनी साधन है जिससे हिरासत में रहे व्यक्ति को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया जा सकता है। बोरा के वकील ने तर्क दिया कि बंधन से वह चल रहे जांच में सहयोग कर सकेंगी और साथ ही उनकी स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहेगी।
प्रवर्तन अधिकारियों ने कहा कि उनके पास प्रारम्भिक साक्ष्य हैं जो बोरा को प्रदर्शन कॉल से जोड़ते हैं, इसलिए उनकी हिरासत उचित थी। न्यायालय ने अंतिम निर्णय को स्थगित कर दिया और दोनों पक्षों को दस दिनों के भीतर अतिरिक्त दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
यह सुनवाई न्यायपालिका के खिलाफ आयोजित किए जाने वाले विरोधों की संवेदनशीलता और उन लोगों के लिए उपलब्ध कानूनी सुरक्षा उपायों को उजागर करती है, जिन पर अशांति भड़काने का आरोप लगाया गया है।
कोर्ट ने शांति बंधन के आवेदन की जांच की, जो एक कानूनी साधन है जिससे हिरासत में रहे व्यक्ति को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया जा सकता है। बोरा के वकील ने तर्क दिया कि बंधन से वह चल रहे जांच में सहयोग कर सकेंगी और साथ ही उनकी स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहेगी।
प्रवर्तन अधिकारियों ने कहा कि उनके पास प्रारम्भिक साक्ष्य हैं जो बोरा को प्रदर्शन कॉल से जोड़ते हैं, इसलिए उनकी हिरासत उचित थी। न्यायालय ने अंतिम निर्णय को स्थगित कर दिया और दोनों पक्षों को दस दिनों के भीतर अतिरिक्त दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
यह सुनवाई न्यायपालिका के खिलाफ आयोजित किए जाने वाले विरोधों की संवेदनशीलता और उन लोगों के लिए उपलब्ध कानूनी सुरक्षा उपायों को उजागर करती है, जिन पर अशांति भड़काने का आरोप लगाया गया है।