🔥 TRENDING चंडी के आभूषण से भरा बैग लूटने की वारद... कटनी: जर्जर भवन पर चला प्रशासन का बुलड... બનાસકાંઠા પોલીસે રાજસ્થાનથી આવતા ૯.૭૧... India, Kazakhstan Review Bilateral Tie... Kushitha Kallapu Stuns in Black Saree,... Mamitha Baiju Makes Telugu Debut in Bl...
08 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
नवंबर में बंद,जून में फिर डंपिंग! SECL की रिपोर्ट पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने उठाए सवाल

नवंबर में बंद,जून में फिर डंपिंग! SECL की रिपोर्ट पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने उठाए सवाल

✍️ Reporter: Vishwanath Pratap Singh 🗓 31 Aug 2026, 10:20 PM 👁 58
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

SECL की रिपोर्ट पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने उठाए सवाल

मानिकपुर ओपन कास्ट खदान में फ्लाई ऐश डंपिंग को लेकर SECL प्रबंधन की ओर से केंद्रीय कोयला मंत्रालय को दी गई जानकारी पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सवाल खड़े किए है, उन्होंने कहा कि SECL की रिपोर्ट और मौके की स्थिति में विरोधाभास नजर आ रहा है जिसकी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
पूर्व मंत्री श्री अग्रवाल के मुताबिक उन्होंने अप्रैल 2026 में केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र भेजकर मानिकपुर ओपन कास्ट खदान में फ्लाई ऐश डंपिंग का मामला उठाया था। इसके जवाब में मंत्रालय को SECL प्रबंधन की ओर से बताया गया कि मानिकपुर की बंद पड़ी खदान में 5 नवंबर 2025 से फ्लाई ऐश डंपिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है।
लेकिन जून 2026 में मौके के प्रत्यक्ष फोटोग्राफ और साक्ष्यों के आधार पर मामला फिर उठाया गया, जिसमें डंपिंग जारी रहने की स्थिति सामने आने का दावा किया गया। इसी को आधार बनाते हुए सवाल किया कि यदि नवंबर 2025 में डंपिंग बंद हो चुकी थी तो जून 2026 में मौके पर डंपिंग कैसे जारी थी? उन्होंने यह भी पूछा कि स्थानीय प्रबंधन बिलासपुर मुख्यालय और केंद्रीय मंत्रालय को आखिर कौन-सी जानकारी दे रहा है।
मामला किसी अधिकारी को बदनाम करने का नहीं’
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि यह किसी अधिकारी विशेष को बदनाम करने का विषय नहीं है बल्कि SECL की संस्थागत जवाबदेही और विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है। उन्होंने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराए जाने तथा यह सार्वजनिक किए जाने की मांग की कि मंत्रालय को जानकारी किस स्तर से और किन परिस्थितियों में भेजी गई थी।
भू-विस्थापितों के हक पर भी सवाल
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने वर्षों से लंबित भू-विस्थापितों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि SECL दशकों से कोरबा की धरती से कोयला निकाल रहा है। विकास का विरोध नहीं है, लेकिन जिन लोगों की जमीन और घर विकास के लिए लिए गए, उन्हें अपने अधिकारों के लिए वर्षों तक भटकना नहीं चाहिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों के सामने आज भी मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और छूटे हुए मकानों एवं जमीन के सर्वे जैसे सवाल लंबित होने की बात कही।
चार मांगों पर SECL से मांगा जवाब
• लंबित मुआवजे का समयबद्ध भुगतान।

• प्रभावित परिवारों का वास्तविक पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन।

• पात्र भू-विस्थापितों के रोजगार प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण।

• छूटे हुए मकानों एवं भूमि का पुनः सर्वे कर हितग्राहियों को उनका अधिकार।

21 अगस्त की जनसुनवाई स्थगित होने का जिक्र
श्री अग्रवाल ने कहा कि 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई के संबंध में उन्होंने और प्रभावित ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित भू-विस्थापितों की समस्याओं को गंभीरता से उठाया था। प्रशासन ने 21 अगस्त की प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित कर दी। उनके अनुसार अब SECL प्रबंधन के पास प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर ठोस और सकारात्मक पहल करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और जमीन-मकान के सर्वे जैसे मामले प्रभावित परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। संवाद, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई से ही प्रभावित लोगों का भरोसा कायम किया जा सकता है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि “विकास भी हो और प्रभावित लोगों के साथ न्याय भी हो” इसी सोच के साथ उनकी पहल जारी रहेगी। उन्होंने SECL प्रबंधन से प्रभावित परिवारों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित कर उनकी जायज समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
📲Get App