Religion
नारौली डांग में 300 हेक्टेयर वन क्षेत्र के बीच स्थित प्राचीन मंदिर, नवरात्र में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु
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नारौली डांग में 300 हेक्टेयर वन क्षेत्र के बीच स्थित प्राचीन मंदिर, नवरात्र में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु
राजस्थान के करौली क्षेत्र के नारौली डांग में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित मां लंकेश्वरी देवी का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। लगभग 400 से 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां माता के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
लंका और रावण से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां लंकेश्वरी देवी का संबंध लंका के राजा रावण से जोड़ा जाता है। मंदिर को लेकर प्रचलित धार्मिक कथाएं श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती हैं। भक्त माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना
नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और माता के दर्शन का सिलसिला चलता है। श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से यहां पहुंचकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा है मंदिर
अरावली की पहाड़ियों और वन क्षेत्र के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को प्रकृति का सुंदर नजारा देखने को मिलता है।
धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र: मां लंकेश्वरी देवी मंदिर क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और लोकमान्यताओं से जुड़ा हुआ है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है।
लंका और रावण से जुड़ी है मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां लंकेश्वरी देवी का संबंध लंका के राजा रावण से जोड़ा जाता है। मंदिर को लेकर प्रचलित धार्मिक कथाएं श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती हैं। भक्त माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना
नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और माता के दर्शन का सिलसिला चलता है। श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से यहां पहुंचकर माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा है मंदिर
अरावली की पहाड़ियों और वन क्षेत्र के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को प्रकृति का सुंदर नजारा देखने को मिलता है।
धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र: मां लंकेश्वरी देवी मंदिर क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और लोकमान्यताओं से जुड़ा हुआ है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है।