📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Social Justice and Empowerment
राजनीति
नागालैंड के राज्यपाल ने हिंदी को स्थानीय भाषाओं के साथ बढ़ावा देने का आह्वान किया
✍️ newsonair.gov.in
🗓 27 सित. 2026, 02:32 PM
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राज्यपाल नंद किशोर यादव ने नागालैंड में हिंदी के साथ स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, भाषा-संरक्षण की महत्ता को रेखांकित किया।
नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने हिंदी के साथ-साथ राज्य की स्थानीय भाषाओं के प्रचार‑प्रसार की आवश्यकता पर सार्वजनिक रूप से कहा। अपने बयान में उन्होंने बहुभाषी क्षमता को बढ़ावा देने के महत्व को रेखांकित किया, जिससे सांस्कृतिक एकीकरण और राष्ट्रीय एकता मजबूत हो सके।
राज्यपाल ने यह स्पष्ट किया कि हिंदी को बढ़ावा देना नागालैंड की समृद्ध भाषा‑संपदा, जिसमें कई जनजातीय बोलियाँ शामिल हैं, के नुकसान के बिना होना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक समूहों से आग्रह किया कि वे हिंदी शिक्षा को शामिल करें, साथ ही स्थानीय भाषाओं को भी पोषित करें।
यह अपील उत्तर‑पूर्व में भाषा नीति और हिंदी को लिंक भाषा के रूप में उपयोग करने के संबंध में चल रही चर्चाओं को दर्शाती है। राज्य के प्राधिकारी भविष्य में भाषा‑योजना में राज्यपाल के सुझावों पर विचार कर सकते हैं।
भाषा विद्वानों और जनजातीय नेताओं को इस बात पर संवाद के लिए आमंत्रित किया गया है कि हिंदी को बढ़ावा देने और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को कैसे संतुलित किया जाए, ताकि दोनों लक्ष्य एक-दूसरे को पूरक बनें।
राज्यपाल का यह आह्वान तब आया है, जब केंद्र सरकार पूरे देश में हिंदी के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है, साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं की संवैधानिक सुरक्षा को भी मान्यता दे रही है।
राज्यपाल ने यह स्पष्ट किया कि हिंदी को बढ़ावा देना नागालैंड की समृद्ध भाषा‑संपदा, जिसमें कई जनजातीय बोलियाँ शामिल हैं, के नुकसान के बिना होना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक समूहों से आग्रह किया कि वे हिंदी शिक्षा को शामिल करें, साथ ही स्थानीय भाषाओं को भी पोषित करें।
यह अपील उत्तर‑पूर्व में भाषा नीति और हिंदी को लिंक भाषा के रूप में उपयोग करने के संबंध में चल रही चर्चाओं को दर्शाती है। राज्य के प्राधिकारी भविष्य में भाषा‑योजना में राज्यपाल के सुझावों पर विचार कर सकते हैं।
भाषा विद्वानों और जनजातीय नेताओं को इस बात पर संवाद के लिए आमंत्रित किया गया है कि हिंदी को बढ़ावा देने और स्थानीय भाषाओं के संरक्षण को कैसे संतुलित किया जाए, ताकि दोनों लक्ष्य एक-दूसरे को पूरक बनें।
राज्यपाल का यह आह्वान तब आया है, जब केंद्र सरकार पूरे देश में हिंदी के अधिक उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है, साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं की संवैधानिक सुरक्षा को भी मान्यता दे रही है।