📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joli Rumi
राजनीति
नागालैंड के वन अधिकारी ने वन्यजीव विवाद में अनुच्छेद 371A के दुरुपयोग पर चेतावनी दी
✍️ India Today NE
🗓 09 अक्टू. 2026, 05:01 AM
👁 11
नागालैंड के वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वन्यजीव विवाद के बीच अनुच्छेद 371A को सावधानीपूर्वक लागू करने की चेतावनी दी, दुरुपयोग से बचने की अपील की।
नागालैंड वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक चेतावनी जारी की, जिसमें उन्होंने वन्यजीव विवाद के प्रकाश में राज्य की विशेष संवैधानिक धारा, अनुच्छेद 371A, के सावधानीपूर्वक उपयोग की अपील की। यह चेतावनी हाल ही में वन और वन्यजीव प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बाद आई है, जहाँ विभिन्न पक्षों ने इस धारा की व्याख्या को लेकर चिंता जताई है।
अनुच्छेद 371A भारतीय संविधान में शामिल है, जो नागालैंड को भूमि, संसाधन और स्थानीय रीति-रिवाजों पर स्वायत्तता प्रदान करता है। जबकि यह धारा क्षेत्र की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत की रक्षा के लिए बनाई गई है, अधिकारी ने बताया कि यदि इसे मूल उद्देश्य से बाहर प्रयोग किया गया तो संरक्षण प्रयासों और कानूनी स्पष्टता दोनों को नुकसान पहुँच सकता है।
विभागीय अधिकारी ने कहा कि इस धारा का दुरुपयोग करने से वन्यजीव संरक्षण और जनजातीय अधिकारों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण संगठनों के बीच संवाद की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह धारा सतत वन प्रबंधन को समर्थन दे, न कि राजनीतिक या प्रशासनिक दुरुपयोग का साधन बनें।
अधिकारियों ने अभी तक कोई तत्काल नीति परिवर्तन नहीं बताया, पर यह बयान नागालैंड में संवैधानिक स्वायत्तता और प्रभावी वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।
अनुच्छेद 371A भारतीय संविधान में शामिल है, जो नागालैंड को भूमि, संसाधन और स्थानीय रीति-रिवाजों पर स्वायत्तता प्रदान करता है। जबकि यह धारा क्षेत्र की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत की रक्षा के लिए बनाई गई है, अधिकारी ने बताया कि यदि इसे मूल उद्देश्य से बाहर प्रयोग किया गया तो संरक्षण प्रयासों और कानूनी स्पष्टता दोनों को नुकसान पहुँच सकता है।
विभागीय अधिकारी ने कहा कि इस धारा का दुरुपयोग करने से वन्यजीव संरक्षण और जनजातीय अधिकारों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण संगठनों के बीच संवाद की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह धारा सतत वन प्रबंधन को समर्थन दे, न कि राजनीतिक या प्रशासनिक दुरुपयोग का साधन बनें।
अधिकारियों ने अभी तक कोई तत्काल नीति परिवर्तन नहीं बताया, पर यह बयान नागालैंड में संवैधानिक स्वायत्तता और प्रभावी वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की बढ़ती सतर्कता को दर्शाता है।