📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Veekthedragon
राजनीति
नागालैंड में बीजेपी ने 60 सीटों पर लड़ने का इरादा, 2028 चुनाव में बीजेडी-एनपीएफ गठबंधन पर परीक्षा
✍️ hubnetwork.in
🗓 30 सित. 2026, 02:01 AM
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नागालैंड की बीजेपी ने सभी 60 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का इरादा जताया, जिससे 2028 के चुनावों में एनपीएफ के साथ गठबंधन पर दबाव बढ़ सकता है।
नागालैंड की भारतीय जनता पार्टी ने सभी 60 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने का इरादा जताया है, जिससे 2028 के चुनावों में अपनी रणनीति में बदलाव का संकेत मिलता है। यह कदम तब आया है जब बीजेपी ने traditionally नगा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) के साथ गठबंधन किया है, जो राज्य में प्रमुख क्षेत्रीय दल रहा है।
कोहिमा में पार्टी के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम जमीनी स्तर पर बीजेपी की पकड़ मजबूत करने और पूरे राज्य में एक समान विकास एजेंडा पेश करने के लिए है। वे मानते हैं कि सभी सीटों पर लड़ने से मतदाताओं को एक स्पष्ट विकल्प मिलेगा और क्षेत्रीय पार्टियों की पकड़ को चुनौती मिलेगी।
एनपीएफ ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आक्रामक रणनीति गठबंधन की स्थिरता को परख सकती है। यदि गठबंधन में दरार आती है, तो नागालैंड की चुनावी गणना बदल सकती है, जहाँ अब तक गठबंधन ही सरकार बनाता आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 का चुनाव दोनों पार्टियों के लिए एक परीक्षा होगा: बीजेपी अपनी संगठनात्मक शक्ति सिद्ध करना चाहती है, जबकि एनपीएफ को यह तय करना होगा कि वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी या फिर सहयोग के नए शर्तों पर बातचीत करेगी।
कोहिमा में पार्टी के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम जमीनी स्तर पर बीजेपी की पकड़ मजबूत करने और पूरे राज्य में एक समान विकास एजेंडा पेश करने के लिए है। वे मानते हैं कि सभी सीटों पर लड़ने से मतदाताओं को एक स्पष्ट विकल्प मिलेगा और क्षेत्रीय पार्टियों की पकड़ को चुनौती मिलेगी।
एनपीएफ ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आक्रामक रणनीति गठबंधन की स्थिरता को परख सकती है। यदि गठबंधन में दरार आती है, तो नागालैंड की चुनावी गणना बदल सकती है, जहाँ अब तक गठबंधन ही सरकार बनाता आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 का चुनाव दोनों पार्टियों के लिए एक परीक्षा होगा: बीजेपी अपनी संगठनात्मक शक्ति सिद्ध करना चाहती है, जबकि एनपीएफ को यह तय करना होगा कि वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी या फिर सहयोग के नए शर्तों पर बातचीत करेगी।