नाचना (जैसलमेर): पंचायत समिति चुनाव को लेकर सियासी गर्माहट, भाजपा के सामने बढ़ी मुश्किलें
नाचना (जैसलमेर): पंचायत समिति चुनाव को लेकर सियासी गर्माहट, भाजपा के सामने बढ़ी मुश्किलें
जैसलमेर जिले की नाचना पंचायत समिति में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार नाचना पंचायत समिति में प्रधान का पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिला के लिए आरक्षित हुआ है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही दावेदारों ने अपनी ताल ठोकनी शुरू कर दी है, लेकिन सबसे प्रमुख और मजबूत दावेदारी सेन समाज की ओर से सामने आई है।
सेन समाज की वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ता उषा भावनी सेन ने नाचना पंचायत समिति से प्रधान पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। उषा भावनी सेन और उनका परिवार पिछले लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी हित में कार्य कर रहा है। क्षेत्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता और समाज में पकड़ को देखते हुए सेन समाज उन्हें प्रधान पद का प्रबल दावेदार मान रहा है।
टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरने का ऐलान
स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार तब और गर्म हो गया जब उषा भावनी सेन के समर्थकों और सेन समाज ने साफ रुख अपना लिया। समाज और उनके समर्थकों का कहना है कि वे वर्षों से भाजपा के प्रति निष्ठावान रहे हैं और इस बार पार्टी से ही टिकट की उम्मीद कर रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने अपनी रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। समर्थकों का कहना है कि यदि भाजपा उषा भावनी सेन को प्रत्याशी बनाती है तो समाज पूरी ताकत से पार्टी को जीत दिलाएगा। लेकिन, यदि किसी कारणवश पार्टी टिकट नहीं देती है, तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। ऐसी स्थिति में उषा भावनी सेन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भाजपा के लिए बढ़ी चुनौती
ओबीसी महिला सीट होने के कारण कई दावेदार रेस में हैं, लेकिन उषा भावनी सेन के निर्दलीय चुनाव लड़ने के ऐलान ने भाजपा के स्थानीय नेतृत्व और रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। यदि भाजपा यहां अपने बागी को साधने में नाकाम रहती है, तो पार्टी को त्रिकोणीय या कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है।
जैसलमेर जिले की नाचना पंचायत समिति में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बार नाचना पंचायत समिति में प्रधान का पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) महिला के लिए आरक्षित हुआ है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही दावेदारों ने अपनी ताल ठोकनी शुरू कर दी है, लेकिन सबसे प्रमुख और मजबूत दावेदारी सेन समाज की ओर से सामने आई है।
सेन समाज की वरिष्ठ और सक्रिय कार्यकर्ता उषा भावनी सेन ने नाचना पंचायत समिति से प्रधान पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। उषा भावनी सेन और उनका परिवार पिछले लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी हित में कार्य कर रहा है। क्षेत्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता और समाज में पकड़ को देखते हुए सेन समाज उन्हें प्रधान पद का प्रबल दावेदार मान रहा है।
टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरने का ऐलान
स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार तब और गर्म हो गया जब उषा भावनी सेन के समर्थकों और सेन समाज ने साफ रुख अपना लिया। समाज और उनके समर्थकों का कहना है कि वे वर्षों से भाजपा के प्रति निष्ठावान रहे हैं और इस बार पार्टी से ही टिकट की उम्मीद कर रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने अपनी रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। समर्थकों का कहना है कि यदि भाजपा उषा भावनी सेन को प्रत्याशी बनाती है तो समाज पूरी ताकत से पार्टी को जीत दिलाएगा। लेकिन, यदि किसी कारणवश पार्टी टिकट नहीं देती है, तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। ऐसी स्थिति में उषा भावनी सेन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
भाजपा के लिए बढ़ी चुनौती
ओबीसी महिला सीट होने के कारण कई दावेदार रेस में हैं, लेकिन उषा भावनी सेन के निर्दलीय चुनाव लड़ने के ऐलान ने भाजपा के स्थानीय नेतृत्व और रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। यदि भाजपा यहां अपने बागी को साधने में नाकाम रहती है, तो पार्टी को त्रिकोणीय या कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है।