अपराध
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 वर्ष की सजा, पीड़िता को ₹5 लाख मुआवजे की अनुशंसा
अंबिकापुर की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी विमल खाखा को 20 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में पीड़िता गर्भवती हुई थी और उसने बच्चे को जन्म दिया था। अदालत ने पीड़िता को ₹5 लाख मुआवजा दिए जाने की भी अनुशंसा की है। Date: 25 July 2026 Location: Ambikapur, Surguja (Chhattisgarh) Reported by: Pankaj Sahu Citizen Reporter | Need24 News
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के कमलेश्वरपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) कमलेश जगदल्ला की अदालत ने दोषी विमल खाखा को 20 वर्ष के कठोर कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्ष 2022 में आरोपी ने नाबालिग को अपने कब्जे में रखकर विभिन्न स्थानों पर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई थी और बाद में उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग को आरोपी के कब्जे से बरामद किया था। मामले में आरोपी के विरुद्ध अपहरण, दुष्कर्म तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए ₹5 लाख मुआवजा दिए जाने की अनुशंसा भी की।
अदालत ने अपने आदेश में माना कि ऐसे मामलों में कठोर दंड समाज में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के प्रति सख्त संदेश देने के लिए आवश्यक है।
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Ambikapur | Surguja | Chhattisgarh
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्ष 2022 में आरोपी ने नाबालिग को अपने कब्जे में रखकर विभिन्न स्थानों पर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई थी और बाद में उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग को आरोपी के कब्जे से बरामद किया था। मामले में आरोपी के विरुद्ध अपहरण, दुष्कर्म तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए ₹5 लाख मुआवजा दिए जाने की अनुशंसा भी की।
अदालत ने अपने आदेश में माना कि ऐसे मामलों में कठोर दंड समाज में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के प्रति सख्त संदेश देने के लिए आवश्यक है।
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