📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ignasi
टेक्नोलॉजी
मुजफ्फरपुर में कचरे से बायो गैस, एआई से साफ‑सफाई निगरानी – जर्मनी‑फ्रांस टीम पहुंची
✍️ Amar Ujala · Muzaffarpur
🗓 06 अक्टू. 2026, 03:15 PM
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जर्मनी और फ्रांस की टीम मुजफ्फरपुर पहुंची है ताकि कचरे से बायो गैस बनाने और एआई से साफ‑सफाई की निगरानी करने वाले प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया जा सके।
मुजफ्फरपुर शहर ने जर्मनी और फ्रांस के विशेषज्ञों की एक टीम को कचरे से बायो गैस बनाने के नवीन प्रोजेक्ट का निरीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया है। यह पहल कचरे को नवीकरणीय ऊर्जा में बदलने के साथ-साथ एआई आधारित साफ‑सफाई निगरानी प्रणाली को भी शामिल करती है।
अंतरराष्ट्रीय टीम शहर में तीन दिन रहेगी, जिसमें वे तकनीक, अवसंरचना और संचालन योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे। वे स्थानीय अधिकारियों और कचरा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
स्रोतों के अनुसार, बायो गैस संयंत्र घरेलू और वाणिज्यिक कचरे को संसाधित करके ऊर्जा उत्पन्न करेगा, जिसे सड़क प्रकाश और सार्वजनिक सुविधाओं में उपयोग किया जाएगा। एआई प्रणाली सेंसर से डेटा एकत्र कर साफ‑सफाई के हॉटस्पॉट पहचान कर कचरा संग्रहण मार्गों को अनुकूलित करेगी।
यह पहल मुजफ्फरपुर की व्यापक स्थिरता योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लैंडफिल उपयोग को कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। विदेशी विशेषज्ञों की उपस्थिति शहर की उन्नत तकनीक अपनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
टीम के निष्कर्षों को उनकी यात्रा के अंत में नगर परिषद को प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि परियोजना को बिहार के अन्य जिलों में विस्तारित किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय टीम शहर में तीन दिन रहेगी, जिसमें वे तकनीक, अवसंरचना और संचालन योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे। वे स्थानीय अधिकारियों और कचरा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
स्रोतों के अनुसार, बायो गैस संयंत्र घरेलू और वाणिज्यिक कचरे को संसाधित करके ऊर्जा उत्पन्न करेगा, जिसे सड़क प्रकाश और सार्वजनिक सुविधाओं में उपयोग किया जाएगा। एआई प्रणाली सेंसर से डेटा एकत्र कर साफ‑सफाई के हॉटस्पॉट पहचान कर कचरा संग्रहण मार्गों को अनुकूलित करेगी।
यह पहल मुजफ्फरपुर की व्यापक स्थिरता योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लैंडफिल उपयोग को कम करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। विदेशी विशेषज्ञों की उपस्थिति शहर की उन्नत तकनीक अपनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
टीम के निष्कर्षों को उनकी यात्रा के अंत में नगर परिषद को प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि परियोजना को बिहार के अन्य जिलों में विस्तारित किया जा सके।