📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jeanne Menj
धर्म
पश्चिम बंगाल में मुस्लिम कारीगरों ने दुर्गा के बाल बुनते, सामुदायिक सौहार्द की कहानी
✍️ The Hindu
🗓 12 अक्टू. 2026, 04:46 AM
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पश्चिम बंगाल में मुस्लिम कारीगरों द्वारा दुर्गा की मूर्ति के बाल बुनने से सामुदायिक सौहार्द का प्रतीक बन रहा है।
पश्चिम बंगाल में कुछ मुस्लिम कारीगरों ने वार्षिक दुर्गा पूजा के दौरान दुर्गा की मूर्ति के बाल बुनने का काम संभाला है। पारंपरिक बुनाई कौशल से तैयार किए गए ये नाजुक बाल, बाद में देवी के सिर पर लगाकर पूर्ण रूप से सजाए जाएंगे।
यह पहल सामुदायिक सौहार्द का प्रतीक मानी जा रही है, क्योंकि यह दर्शाती है कि विभिन्न धर्मों के लोग त्यौहार की तैयारियों में मिलजुल कर काम करते हैं। पूजा समिति ने इस योगदान का स्वागत किया और कहा कि यह दुर्गा पूजा के समावेशी संदेश को और मजबूत करता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कदम से बंगाल में लंबे समय से मौजूद अंतर‑धार्मिक संबंधों को नई पहचान मिलेगी, विशेषकर ऐसी बड़ी सभा में जहाँ लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। कारीगरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए, पर उनका काम अंतिम विसर्जन पर आयोजित परेड में जनता के सामने दिखाई देगा।
यह पहल सामुदायिक सौहार्द का प्रतीक मानी जा रही है, क्योंकि यह दर्शाती है कि विभिन्न धर्मों के लोग त्यौहार की तैयारियों में मिलजुल कर काम करते हैं। पूजा समिति ने इस योगदान का स्वागत किया और कहा कि यह दुर्गा पूजा के समावेशी संदेश को और मजबूत करता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कदम से बंगाल में लंबे समय से मौजूद अंतर‑धार्मिक संबंधों को नई पहचान मिलेगी, विशेषकर ऐसी बड़ी सभा में जहाँ लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। कारीगरों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए, पर उनका काम अंतिम विसर्जन पर आयोजित परेड में जनता के सामने दिखाई देगा।