📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / U.S. Air Force photo by Airman 1st Class Nathaniel
रक्षा
जोधपुर एयर फ़ोर्स स्टेशन पर शुरू हुआ बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास “तरंग शक्ति 2026”
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 26 सित. 2026, 04:45 PM
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भारतीय वायुसेना ने जोधपुर में तरंग शक्ति 2026 हवाई अभ्यास का शुभारंभ किया, जिसमें 40 से अधिक देशों के F‑35, राफ़ेल और F‑16 जैसे आधुनिक विमानों की भागीदारी है।
राजस्थान के जोधपुर एयर फ़ोर्स स्टेशन ने आज तरंग शक्ति 2026 बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास का शुभारम्भ किया, जो अब तक के सबसे बड़े संयुक्त ड्रिल में से एक माना जा रहा है। उद्घाटन समारोह में भारतीय रक्षा अधिकारियों और भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
40 से अधिक देशों ने अपने विमान और कर्मियों को इस अभ्यास में भेजा है, जिससे इस कार्यक्रम का अंतरराष्ट्रीय महत्व स्पष्ट होता है। एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका के कई राष्ट्र इस दौरान विभिन्न चरणों में भाग लेंगे, जिससे विभिन्न वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ेगा।
इस ड्रिल में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों जैसे अमेरिकी F‑35 लाइटनिंग II, फ्रांसीसी राफ़ेल और संयुक्त राज्य तथा सहयोगी देशों का F‑16 फाइटिंग फाल्कन एक साथ कार्य करेंगे। परिदृश्य में वायु‑से‑वायु मुकाबला, स्ट्राइक ऑपरेशन और समन्वित वायु‑रक्षा रणनीतियों का अभ्यास शामिल है, जिसका उद्देश्य रणनीतिक तालमेल को सुदृढ़ करना है।
भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में मुख्य समन्वयक के रूप में कार्य कर रही है, लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रही है और विभिन्न देशों की कार्यविधियों को एकीकृत कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है और भारत की जटिल, उच्च‑प्रोफ़ाइल रक्षा कार्यक्रमों की मेजबानी करने की क्षमता को दर्शाता है।
40 से अधिक देशों ने अपने विमान और कर्मियों को इस अभ्यास में भेजा है, जिससे इस कार्यक्रम का अंतरराष्ट्रीय महत्व स्पष्ट होता है। एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और अमेरिका के कई राष्ट्र इस दौरान विभिन्न चरणों में भाग लेंगे, जिससे विभिन्न वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ेगा।
इस ड्रिल में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों जैसे अमेरिकी F‑35 लाइटनिंग II, फ्रांसीसी राफ़ेल और संयुक्त राज्य तथा सहयोगी देशों का F‑16 फाइटिंग फाल्कन एक साथ कार्य करेंगे। परिदृश्य में वायु‑से‑वायु मुकाबला, स्ट्राइक ऑपरेशन और समन्वित वायु‑रक्षा रणनीतियों का अभ्यास शामिल है, जिसका उद्देश्य रणनीतिक तालमेल को सुदृढ़ करना है।
भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में मुख्य समन्वयक के रूप में कार्य कर रही है, लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रही है और विभिन्न देशों की कार्यविधियों को एकीकृत कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है और भारत की जटिल, उच्च‑प्रोफ़ाइल रक्षा कार्यक्रमों की मेजबानी करने की क्षमता को दर्शाता है।