📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Authors of the study:
Sergio M. Latorre,
Vincent M
स्थानीय
इंदौर रानी सराय मेट्रो साइट पर 160 पेड़ और पक्षी आवास को हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 23 सित. 2026, 08:01 AM
👁 9
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर के रानी सराय मेट्रो स्टेशन निर्माण स्थल पर 160 पेड़ों और सैकड़ों पक्षियों के आवास को सुरक्षित रखने का आदेश बरकरार रखा, जो नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी की याचिका के बाद आया।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर के रानी सराय मेट्रो स्टेशन निर्माण परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव पर सुनवाई के बाद 160 बड़े पेड़ों को सुरक्षित रखने का पूर्व आदेश बरकरार रखा। कोर्ट ने उन सैकड़ों पक्षियों के घोंसले वाले आवास को भी बाधित न करने का निर्देश दिया।
यह याचिका नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी ने दायर की थी, जिसने पेड़ों की कटाई और पक्षी आवास के व्यवधान को पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के रूप में उजागर किया। कोर्ट के फैसले ने शहरी बुनियादी ढाँचा विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
निर्णय के बावजूद मेट्रो प्राधिकरण को अब संरक्षित पेड़ों से बचने के लिए परियोजना के कुछ हिस्सों को पुनः डिज़ाइन करना होगा। नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी ने साइट की पारिस्थितिक महत्ता का आकलन करने और आगे के कार्यों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग की है।
यह आदेश राज्य में भविष्य के बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट्स के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे पर्यावरणीय सुरक्षा को लागू करने में न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट होती है, जबकि आवश्यक सार्वजनिक परिवहन पहल को आगे बढ़ाने की राह भी खुलती है।
यह याचिका नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी ने दायर की थी, जिसने पेड़ों की कटाई और पक्षी आवास के व्यवधान को पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के रूप में उजागर किया। कोर्ट के फैसले ने शहरी बुनियादी ढाँचा विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
निर्णय के बावजूद मेट्रो प्राधिकरण को अब संरक्षित पेड़ों से बचने के लिए परियोजना के कुछ हिस्सों को पुनः डिज़ाइन करना होगा। नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी ने साइट की पारिस्थितिक महत्ता का आकलन करने और आगे के कार्यों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग की है।
यह आदेश राज्य में भविष्य के बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट्स के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जिससे पर्यावरणीय सुरक्षा को लागू करने में न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट होती है, जबकि आवश्यक सार्वजनिक परिवहन पहल को आगे बढ़ाने की राह भी खुलती है।