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देश
MP हाई कोर्ट: हिंदू विवाह पंजीकरण/विच्छेद के लिए नोटरीकृत समझौते अमान्य
✍️ Live Law
🗓 07 जुल. 2026, 11:02 PM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि हिंदू विवाह को संपन्न कराने या भंग करने के लिए नोटरीकृत समझौतों का उपयोग नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसे समझौतों में इन उद्देश्यों के लिए कानूनी मान्यता का अभाव है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह को संपन्न कराने या भंग करने के लिए नोटरीकृत समझौतों का कोई कानूनी आधार नहीं है। अदालत की इस टिप्पणी पर जोर दिया गया है कि ऐसे समझौते हिंदू विवाह कानूनों के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का विकल्प नहीं हो सकते।
यह फैसला हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण और तलाक की कार्यवाही की वैधता को स्पष्ट करता है। नोटरीकृत दस्तावेज, अन्य कानूनी उद्देश्यों के लिए उपयोगी होने के बावजूद, विशेष रूप से हिंदू विवाह स्थापित करने या समाप्त करने के लिए अपर्याप्त माने गए हैं। अदालत का यह रुख वैवाहिक संघों और अलगाव के लिए वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करने के महत्व को पुष्ट करता है।
हाई कोर्ट के इस निर्णय से यह बात रेखांकित होती है कि हिंदू विवाह को शुरू करने या समाप्त करने के लिए केवल कानूनी रूप से निर्धारित तरीकों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे भारत में वैवाहिक संबंधों को नियंत्रित करने वाले स्थापित कानूनी ढांचे का अनुपालन सुनिश्चित होता है।
यह फैसला हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण और तलाक की कार्यवाही की वैधता को स्पष्ट करता है। नोटरीकृत दस्तावेज, अन्य कानूनी उद्देश्यों के लिए उपयोगी होने के बावजूद, विशेष रूप से हिंदू विवाह स्थापित करने या समाप्त करने के लिए अपर्याप्त माने गए हैं। अदालत का यह रुख वैवाहिक संघों और अलगाव के लिए वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करने के महत्व को पुष्ट करता है।
हाई कोर्ट के इस निर्णय से यह बात रेखांकित होती है कि हिंदू विवाह को शुरू करने या समाप्त करने के लिए केवल कानूनी रूप से निर्धारित तरीकों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे भारत में वैवाहिक संबंधों को नियंत्रित करने वाले स्थापित कानूनी ढांचे का अनुपालन सुनिश्चित होता है।