📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Andrew Hill
ऑटोमोबाइल
MOT डेटा से पता चला: अधिक माइलेज वाले ई‑वी पेट्रोल कारों से अधिक टिकाऊ
✍️ Fleet News
🗓 23 सित. 2026, 04:46 AM
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हालिया MOT जांचों में दिखा कि अधिक माइलेज वाले इलेक्ट्रिक कारों में पेट्रोल कारों की तुलना में कम खराबी आती है, जिससे उनकी टिकाऊपन की पुष्टि होती है।
हालिया MOT (मिनिस्ट्री ऑफ़ ट्रांसपोर्ट) परीक्षणों के आंकड़ों में एक स्पष्ट रुझान सामने आया है: अधिक माइलेज वाली इलेक्ट्रिक कारें (ई‑वी) पेट्रोल‑चलित कारों की तुलना में कम दोष दिखा रही हैं। देश भर के हजारों MOT निरीक्षणों से प्राप्त डेटा ने 1,00,000 किलोमीटर से अधिक चलाए गए वाहनों की विफलता दरों की तुलना की।
परिणामों से पता चलता है कि उच्च माइलेज वाली ई‑वी ने औसतन 12 प्रतिशत परीक्षणों में विफलता दर्ज की, जबकि समान आयु और माइलेज वाली पेट्रोल कारों में यह दर लगभग 19 प्रतिशत थी। पेट्रोल कारों में मुख्य समस्याएँ एग्जॉस्ट सिस्टम के घिसाव और इंजन तेल के रिसाव की थीं, जबकि ई‑वी में मुख्य रूप से छोटे इलेक्ट्रिकल अलर्ट दिखे, जिन्हें जल्दी ठीक किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा फ्लीट खरीद निर्णयों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि ऑपरेटर अब उच्च उपयोग वाले वाहनों के लिए रखरखाव लागत और प्रारंभिक कीमत के बीच संतुलन देखेंगे। कम विफलता दर यह संकेत देती है कि ई‑वी का उपयोगी जीवनकाल अधिक हो सकता है, जिससे व्यवसायों को डाउनटाइम और सेवा खर्च में कमी मिल सकती है।
ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने इस परिणाम का स्वागत किया है और बताया कि बैटरी प्रबंधन प्रणाली और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीकों ने आधुनिक इलेक्ट्रिक मॉडलों की टिकाऊपन को बढ़ाया है। फिर भी, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जैसे-जैसे ई‑वी फ्लीट बढ़ेगा और नई तकनीकें आएँगी, निरंतर निगरानी आवश्यक रहेगी।
परिणामों से पता चलता है कि उच्च माइलेज वाली ई‑वी ने औसतन 12 प्रतिशत परीक्षणों में विफलता दर्ज की, जबकि समान आयु और माइलेज वाली पेट्रोल कारों में यह दर लगभग 19 प्रतिशत थी। पेट्रोल कारों में मुख्य समस्याएँ एग्जॉस्ट सिस्टम के घिसाव और इंजन तेल के रिसाव की थीं, जबकि ई‑वी में मुख्य रूप से छोटे इलेक्ट्रिकल अलर्ट दिखे, जिन्हें जल्दी ठीक किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा फ्लीट खरीद निर्णयों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि ऑपरेटर अब उच्च उपयोग वाले वाहनों के लिए रखरखाव लागत और प्रारंभिक कीमत के बीच संतुलन देखेंगे। कम विफलता दर यह संकेत देती है कि ई‑वी का उपयोगी जीवनकाल अधिक हो सकता है, जिससे व्यवसायों को डाउनटाइम और सेवा खर्च में कमी मिल सकती है।
ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने इस परिणाम का स्वागत किया है और बताया कि बैटरी प्रबंधन प्रणाली और रीजेनरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीकों ने आधुनिक इलेक्ट्रिक मॉडलों की टिकाऊपन को बढ़ाया है। फिर भी, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जैसे-जैसे ई‑वी फ्लीट बढ़ेगा और नई तकनीकें आएँगी, निरंतर निगरानी आवश्यक रहेगी।