📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hiart
मौसम
इंस्टिट्यूट ऑफ़ मॉन्सून डिवीजन ने कहा, पश्चिम राजस्थान में 19 सितंबर से मानसून पीछे हट सकता है
✍️ Business Standard
🗓 15 सित. 2026, 03:31 AM
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इंडिया मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि 19 सितंबर से पश्चिम राजस्थान में मानसून का वापसी चरण शुरू हो सकता है।
इंडिया मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक अल्पकालिक पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि 19 सितंबर से पश्चिम राजस्थान में मानसून का वापसी चरण शुरू हो सकता है। यह पूर्वानुमान नवीनतम उपग्रह डेटा और मॉडल सिमुलेशन पर आधारित है, जो इस क्षेत्र में मानसून ट्रफ़्ट के धीरे‑धीरे कमजोर होने को दर्शाते हैं।
IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों में पश्चिमी राजस्थान में वर्षा की तीव्रता में कमी आएगी और नमी का केंद्र राज्य के मध्य व पूर्वी भागों की ओर स्थानांतरित होगा। किसानों और स्थानीय प्राधिकरणों को जलाशयों की स्थिति पर करीबी नज़र रखने और कम होती वर्षा के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
मानसून का वापसी चरण मध्य‑सितंबर में उत्तर‑पश्चिम भारत में सामान्य मौसमी बदलाव है। जबकि भारी बारिश से राहत मिल सकती है, यह क्षेत्र के शुष्क इलाकों में सिंचाई के लिए जल उपलब्धता को लेकर चिंताएँ भी बढ़ाता है।
राजस्थान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से जल‑संचयन उपाय अपनाने और बीज बोने के समय‑सारणी को इस बदलाव के अनुसार समायोजित करने का आग्रह किया है। IMD स्थिति के विकास के साथ दैनिक अपडेट जारी करता रहेगा।
किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और अन्य हितधारकों द्वारा इस पूर्वानुमान पर करीबी नज़र रखी जा रही है, क्योंकि मानसून के वापसी का समय फसल उत्पादन, भूजल पुनर्भरण और समग्र कृषि योजना को प्रभावित कर सकता है।
IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों में पश्चिमी राजस्थान में वर्षा की तीव्रता में कमी आएगी और नमी का केंद्र राज्य के मध्य व पूर्वी भागों की ओर स्थानांतरित होगा। किसानों और स्थानीय प्राधिकरणों को जलाशयों की स्थिति पर करीबी नज़र रखने और कम होती वर्षा के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
मानसून का वापसी चरण मध्य‑सितंबर में उत्तर‑पश्चिम भारत में सामान्य मौसमी बदलाव है। जबकि भारी बारिश से राहत मिल सकती है, यह क्षेत्र के शुष्क इलाकों में सिंचाई के लिए जल उपलब्धता को लेकर चिंताएँ भी बढ़ाता है।
राजस्थान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से जल‑संचयन उपाय अपनाने और बीज बोने के समय‑सारणी को इस बदलाव के अनुसार समायोजित करने का आग्रह किया है। IMD स्थिति के विकास के साथ दैनिक अपडेट जारी करता रहेगा।
किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और अन्य हितधारकों द्वारा इस पूर्वानुमान पर करीबी नज़र रखी जा रही है, क्योंकि मानसून के वापसी का समय फसल उत्पादन, भूजल पुनर्भरण और समग्र कृषि योजना को प्रभावित कर सकता है।