📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pranjalvsv
राजनीति
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में बच्चों के साथ राखी बांधी, शक्कर महँगी करने की मांग की
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 26 अग. 2026, 04:02 PM
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इंदौर में आयोजित राखी समारोह में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बच्चों के साथ राखी बांधी, अंताक्षरी खेली और सड़क, शक्कर, ग्रीन एनर्जी व अमेरिका वीजा पर स्पष्ट बयान दिए।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार को इंदौर में आयोजित राखी समारोह में भाग लिया, जहाँ उन्होंने स्कूल‑उम्र के बच्चों के साथ राखी बांधी और अंताक्षरी में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने और युवाओं को उत्सव में शामिल करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
बच्चों के साथ बातचीत के दौरान विजयवर्गीय ने कई नीति‑सम्बंधी मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने राज्य की सड़कों की हालत की आलोचना की, ग्रीन एनर्जी के तेज़ अपनाने की वकालत की और भारतीयों को अमेरिकी वीज़ा प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों पर निराशा जताई।
विजयवर्गीय ने देश की मिठाई‑प्रेमी आदतों पर भी टिप्पणी की, यह कहते हुए कि लगभग 90 प्रतिशत लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते और शक्कर की कीमतें बढ़ाकर अत्यधिक सेवन को रोकना चाहिए। यह बयान हल्के‑फुल्के अंदाज़ में दिया गया, पर शक्कर पर कर बढ़ाने के उनके प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया।
उनकी बातों को स्थानीय मीडिया ने रिकॉर्ड किया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर चर्चा का विषय बना दिया, जहाँ कुछ लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की, जबकि अन्य ने शक्कर की कीमतें बढ़ाने की व्यवहारिकता पर सवाल उठाए।
समारोह के अंत में एक संक्षिप्त सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसके बाद मंत्री ने उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया और बुनियादी ढाँचा व पर्यावरणीय स्थिरता को सुधारने वाली सरकारी पहलों का समर्थन करने का आह्वान किया।
बच्चों के साथ बातचीत के दौरान विजयवर्गीय ने कई नीति‑सम्बंधी मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने राज्य की सड़कों की हालत की आलोचना की, ग्रीन एनर्जी के तेज़ अपनाने की वकालत की और भारतीयों को अमेरिकी वीज़ा प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों पर निराशा जताई।
विजयवर्गीय ने देश की मिठाई‑प्रेमी आदतों पर भी टिप्पणी की, यह कहते हुए कि लगभग 90 प्रतिशत लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते और शक्कर की कीमतें बढ़ाकर अत्यधिक सेवन को रोकना चाहिए। यह बयान हल्के‑फुल्के अंदाज़ में दिया गया, पर शक्कर पर कर बढ़ाने के उनके प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया।
उनकी बातों को स्थानीय मीडिया ने रिकॉर्ड किया और सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर चर्चा का विषय बना दिया, जहाँ कुछ लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की, जबकि अन्य ने शक्कर की कीमतें बढ़ाने की व्यवहारिकता पर सवाल उठाए।
समारोह के अंत में एक संक्षिप्त सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जिसके बाद मंत्री ने उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया और बुनियादी ढाँचा व पर्यावरणीय स्थिरता को सुधारने वाली सरकारी पहलों का समर्थन करने का आह्वान किया।