📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
राजनीति
MIB ने टीवी चैनलों को सनसनीखेज रिपोर्टिंग रोकने और एआई को सहायक उपयोग तक सीमित करने का निर्देश दिया
✍️ BMI
🗓 22 अक्टू. 2026, 04:02 AM
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी प्रसारकों को सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचने और एआई को केवल सहायक उपयोग तक सीमित रखने की सलाह दी है, जैसा कि बीएमआई के बयान में कहा गया।
नई दिल्ली – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने देश भर के टेलीविज़न चैनलों को सनसनीखेज कवरेज से बचने का निर्देश जारी किया है। इस सलाह में समाचार कक्षों को तथ्यात्मक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देने और ऐसी सामग्री से दूर रहने की चेतावनी दी गई है जो जन भावना को उकसा सकती है।
इसके साथ ही, मंत्रालय ने मीडिया उत्पादन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका को उजागर किया, पर यह कहा कि एआई टूल्स को केवल ट्रांसक्रिप्शन, कैप्शनिंग या डेटा विश्लेषण जैसी सहायक कार्यों के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। बिना मानवीय संपादकीय नियंत्रण के एआई द्वारा समाचार निर्माण या प्रसार को रोकने की सलाह दी गई है।
बीएमआई के माध्यम से जारी किए गए इस दिशा‑निर्देश में सनसनीखेज रिपोर्टिंग के सामाजिक सामंजस्य पर संभावित प्रभाव और पत्रकारिता में नई तकनीकों के नैतिक उपयोग को लेकर चल रही चिंताओं को दर्शाया गया है। चैनलों को इन सिफ़ारिशों को अपनी संपादकीय नीतियों में शीघ्रता से शामिल करने का आग्रह किया गया है।
वर्तमान में अनुपालन न करने पर कोई दंड घोषित नहीं किया गया है, पर मंत्रालय ने बताया कि लगातार उल्लंघन करने वाले चैनलों पर मौजूदा प्रसारण नियमों के तहत नियामक जांच की जा सकती है।
इसके साथ ही, मंत्रालय ने मीडिया उत्पादन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका को उजागर किया, पर यह कहा कि एआई टूल्स को केवल ट्रांसक्रिप्शन, कैप्शनिंग या डेटा विश्लेषण जैसी सहायक कार्यों के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। बिना मानवीय संपादकीय नियंत्रण के एआई द्वारा समाचार निर्माण या प्रसार को रोकने की सलाह दी गई है।
बीएमआई के माध्यम से जारी किए गए इस दिशा‑निर्देश में सनसनीखेज रिपोर्टिंग के सामाजिक सामंजस्य पर संभावित प्रभाव और पत्रकारिता में नई तकनीकों के नैतिक उपयोग को लेकर चल रही चिंताओं को दर्शाया गया है। चैनलों को इन सिफ़ारिशों को अपनी संपादकीय नीतियों में शीघ्रता से शामिल करने का आग्रह किया गया है।
वर्तमान में अनुपालन न करने पर कोई दंड घोषित नहीं किया गया है, पर मंत्रालय ने बताया कि लगातार उल्लंघन करने वाले चैनलों पर मौजूदा प्रसारण नियमों के तहत नियामक जांच की जा सकती है।