📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep Chakraborty
विज्ञान
मेघालय में जल निकाय बढ़े, सिल्टेशन खतरा बढ़ा
✍️ Hub News
🗓 05 अक्टू. 2026, 10:31 AM
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हालिया अवलोकनों से पता चलता है कि मेघालय के झीलों और तालाबों का विस्तार हो रहा है, जबकि विशेषज्ञ सिल्टेशन के बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी दे रहे हैं।
मेघालय में हालिया सर्वेक्षणों ने कई जल निकायों, जैसे मौसमी झीलें और गाँव के तालाब, के सतह क्षेत्र में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की है। यह विस्तार अधिक वर्षा और प्राकृतिक जलसंचयन के कारण है, जिससे पानी अधिक क्षेत्र में जमा हो रहा है।
इसी दौरान पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि सिल्टेशन की गति तेज हो रही है, जिससे इन जल निकायों की गहराई घट रही है और जलधारण क्षमता कम हो रही है। सिल्टेशन जल में पोषक तत्वों के अत्यधिक संचय को भी बढ़ा सकता है, जिससे जैव विविधता और स्थानीय जल आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता है।
राज्य के अधिकारी इस स्थिति पर नज़र रख रहे हैं और समुदायों से मिट्टी‑संरक्षण उपाय अपनाने का आग्रह कर रहे हैं ताकि सतही जल प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके। निरंतर निगरानी से यह तय होगा कि बढ़ते जल निकायों को पर्यावरणीय क्षति के बिना कैसे बनाए रखा जा सके।
यह विकास मेघालय के पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक जल‑संसाधन विस्तार और सतत जलक्षेत्र प्रबंधन के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करता है।
इसी दौरान पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि सिल्टेशन की गति तेज हो रही है, जिससे इन जल निकायों की गहराई घट रही है और जलधारण क्षमता कम हो रही है। सिल्टेशन जल में पोषक तत्वों के अत्यधिक संचय को भी बढ़ा सकता है, जिससे जैव विविधता और स्थानीय जल आपूर्ति दोनों पर असर पड़ सकता है।
राज्य के अधिकारी इस स्थिति पर नज़र रख रहे हैं और समुदायों से मिट्टी‑संरक्षण उपाय अपनाने का आग्रह कर रहे हैं ताकि सतही जल प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके। निरंतर निगरानी से यह तय होगा कि बढ़ते जल निकायों को पर्यावरणीय क्षति के बिना कैसे बनाए रखा जा सके।
यह विकास मेघालय के पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक जल‑संसाधन विस्तार और सतत जलक्षेत्र प्रबंधन के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करता है।