📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / PJeganathan
यात्रा
मेघालय के अनोखे लिविंग रूट ब्रिज को राष्ट्रीय पहचान मिली
✍️ Deccan Herald
🗓 01 जुल. 2026, 06:17 AM
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प्रधानमंत्री के 'मन की बात' संबोधन में उल्लेख के बाद, मेघालय के विशिष्ट लिविंग रूट ब्रिज के संरक्षण के प्रयासों पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित हुआ है।
मेघालय के अद्भुत लिविंग रूट ब्रिज, जो एक अनूठी जैव-इंजीनियरिंग का चमत्कार हैं, अब राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। ये प्राकृतिक संरचनाएं, जो फिकस इलास्टिका पेड़ की हवाई जड़ों को नदियों और धाराओं के पार निर्देशित करके बनाई जाती हैं, पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान का प्रमाण हैं।
चेरापूंजी और मावलिननोंग जैसे क्षेत्रों में पाए जाने वाले इन प्राचीन पुलों के संरक्षण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम में उल्लेख के बाद प्रमुखता मिली है। इस राष्ट्रीय मंच ने इन प्राकृतिक विरासत स्थलों को संरक्षित करने के महत्व को व्यापक पहचान दिलाई है।
ये जैव-पुल न केवल स्थानीय कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। पूरे देश में इन पुलों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने और उनके अद्वितीय सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं।
चेरापूंजी और मावलिननोंग जैसे क्षेत्रों में पाए जाने वाले इन प्राचीन पुलों के संरक्षण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम में उल्लेख के बाद प्रमुखता मिली है। इस राष्ट्रीय मंच ने इन प्राकृतिक विरासत स्थलों को संरक्षित करने के महत्व को व्यापक पहचान दिलाई है।
ये जैव-पुल न केवल स्थानीय कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। पूरे देश में इन पुलों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने और उनके अद्वितीय सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं।