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शिक्षा
मेघालय में एनईपी कार्यान्वयन में भाषा और शिक्षक कमी की बाधाएँ
✍️ Highland Post
🗓 10 अक्टू. 2026, 03:32 PM
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राज्य अधिकारियों के अनुसार, मेघालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में स्थानीय भाषाओं की जरूरत और योग्य शिक्षकों की कमी बाधा बन रही है।
मेघालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को अपने स्कूल प्रणाली में शामिल करने की कोशिश कर रहा है, परंतु इस प्रक्रिया में कई बाधाएँ सामने आ रही हैं, यह बात शिक्षा मंत्री मुकुल रिम्बुयी ने कही। राज्य का लक्ष्य एक लचीला, कौशल‑आधारित पाठ्यक्रम अपनाना है, साथ ही स्थानीय भाषाओं की विविधता को संरक्षित रखना है।
पहली समस्या भाषा से जुड़ी है। मेघालय में खासी, गारो और जैंटिया जैसी कई मातृभाषाएँ मान्यता प्राप्त हैं, और एनईपी के तहत बच्चे की पहली भाषा में पढ़ाना अनिवार्य है। लेकिन इन भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों और शैक्षणिक सामग्री की कमी के कारण अंग्रेजी‑माध्यमी शिक्षा से बदलाव कठिन हो रहा है।
दूसरी बड़ी चुनौती योग्य शिक्षकों की कमी है। राज्य शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 30 % से अधिक पद खाली हैं, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में बाधाएँ और बहुभाषी शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षक कम हैं।
इन अंतराल को पाटने के लिए सरकार ने तेज़ गति से शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने और केंद्र से क्षेत्रीय भाषा पाठ्यक्रम विकसित करने में सहायता माँगने का एलान किया है। फिर भी रिम्बुयी ने चेतावनी दी कि त्वरित उपाय न किए गए तो एनईपी के लक्ष्य मेघालय के छात्रों के लिए अधूरे रह सकते हैं।
पहली समस्या भाषा से जुड़ी है। मेघालय में खासी, गारो और जैंटिया जैसी कई मातृभाषाएँ मान्यता प्राप्त हैं, और एनईपी के तहत बच्चे की पहली भाषा में पढ़ाना अनिवार्य है। लेकिन इन भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों और शैक्षणिक सामग्री की कमी के कारण अंग्रेजी‑माध्यमी शिक्षा से बदलाव कठिन हो रहा है।
दूसरी बड़ी चुनौती योग्य शिक्षकों की कमी है। राज्य शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 30 % से अधिक पद खाली हैं, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में बाधाएँ और बहुभाषी शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षक कम हैं।
इन अंतराल को पाटने के लिए सरकार ने तेज़ गति से शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने और केंद्र से क्षेत्रीय भाषा पाठ्यक्रम विकसित करने में सहायता माँगने का एलान किया है। फिर भी रिम्बुयी ने चेतावनी दी कि त्वरित उपाय न किए गए तो एनईपी के लक्ष्य मेघालय के छात्रों के लिए अधूरे रह सकते हैं।