📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Magnussen, Friedrich (1914-1987)
कृषि
उमियाम में CAU अकादमिक सभा में मेघालय के किसान और वैज्ञानिकों को सम्मानित
✍️ Hub News
🗓 01 नव. 2026, 07:32 PM
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उमियाम में आयोजित CAU अकादमिक सभा में मेघालय के किसान और कृषि वैज्ञानिकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
Centre for Agricultural University (CAU) ने उमियाम में अपने अकादमिक सभा के दौरान मेघालय के किसान और कृषि वैज्ञानिकों को सम्मानित किया। इस समारोह में स्थानीय किसान, शोधकर्ता और CAU के अधिकारियों ने भाग लेकर कृषि में सुधार के लिए उनके योगदान को सराहा।
आयोजकों ने बताया कि इन सम्मानित व्यक्तियों ने जलवायु‑सहनशील किस्मों को अपनाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और अनुसंधान संस्थानों व खेतों के बीच ज्ञान का आदान‑प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन प्रयासों से मेघालय के पहाड़ी क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय में सुधार हुआ है।
समारोह ने विज्ञान और खेती के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की CAU की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और भविष्य में अनियमित वर्षा और बाजार तक पहुँच जैसे चुनौतियों का सामना करने के लिए साझेदारी को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उपस्थित लोगों को इस सफलता को आगे बढ़ाते रहने और क्षेत्रीय कृषि विकास को तेज करने का संदेश दिया गया।
इन योगदानकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करके, CAU अन्य हितधारकों को नवाचारी तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहता है और उत्तर‑पूर्वी भारत में कृषि प्रगति की गति को बनाए रखना चाहता है।
आयोजकों ने बताया कि इन सम्मानित व्यक्तियों ने जलवायु‑सहनशील किस्मों को अपनाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और अनुसंधान संस्थानों व खेतों के बीच ज्ञान का आदान‑प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन प्रयासों से मेघालय के पहाड़ी क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय में सुधार हुआ है।
समारोह ने विज्ञान और खेती के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की CAU की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और भविष्य में अनियमित वर्षा और बाजार तक पहुँच जैसे चुनौतियों का सामना करने के लिए साझेदारी को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उपस्थित लोगों को इस सफलता को आगे बढ़ाते रहने और क्षेत्रीय कृषि विकास को तेज करने का संदेश दिया गया।
इन योगदानकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करके, CAU अन्य हितधारकों को नवाचारी तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहता है और उत्तर‑पूर्वी भारत में कृषि प्रगति की गति को बनाए रखना चाहता है।