📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Indian Navy
बिज़नेस
माज़ागॉन डॉक ने किया 15,000 करोड़ रुपये का निवेश, आंध्र प्रदेश में नया ग्रीनफ़ील्ड शिपयार्ड
✍️ Moneycontrol.com
🗓 18 सित. 2026, 09:16 PM
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माज़ागॉन डॉक ने आंध्र प्रदेश में ग्रीनफ़ील्ड शिपयार्ड के निर्माण के लिये 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की, जिससे भारत की शिपबिल्डिंग क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
राज्य‑स्वामित्व वाली शिपबिल्डिंग कंपनी माज़ागॉन डॉक लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश में ग्रीनफ़ील्ड शिपयार्ड के निर्माण के लिये 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना घोषित की है। इस परियोजना से भारत की वाणिज्यिक एवं रक्षा नौसैनिक निर्माण क्षमता में वृद्धि होगी और क्षेत्र में हजारों रोजगार सृजित होंगे। कंपनी ने बताया कि शिपयार्ड एक नई प्राप्त तटीय भूमि पर आधुनिक बुनियादी ढाँचे और उन्नत शिपबिल्डिंग तकनीकों के साथ बनाया जाएगा। यह निवेश भारत की समुद्री स्वावलंबन को बढ़ाने के सरकारी लक्ष्य के अनुरूप है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है, क्योंकि इससे राज्य की आर्थिक वृद्धि में तेजी आएगी और सहायक उद्योगों को आकर्षित किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि यह शिपयार्ड विद्यमान समुद्री केंद्रों, जैसे कि विशाखापत्तनम, को पूरक करेगा और मेक इन इंडिया पहल को सुदृढ़ करेगा। माज़ागॉन डॉक घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ तकनीकी सहयोग और उपकरण आपूर्ति के लिये काम करेगा।
15,000 करोड़ रुपये की फंडिंग कंपनी के आंतरिक संचित निधियों और सरकारी वित्तीय साधनों से की जाएगी। यह परियोजना हालिया नीतियों के साथ मेल खाती है, जो ग्रीनफ़ील्ड विकास को प्रोत्साहन और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर केंद्रित हैं। भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी मिलने पर शिपयार्ड का निर्माण मध्य‑2020 के दशक में पूरा होने की उम्मीद है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है, क्योंकि इससे राज्य की आर्थिक वृद्धि में तेजी आएगी और सहायक उद्योगों को आकर्षित किया जा सकेगा। अधिकारियों का मानना है कि यह शिपयार्ड विद्यमान समुद्री केंद्रों, जैसे कि विशाखापत्तनम, को पूरक करेगा और मेक इन इंडिया पहल को सुदृढ़ करेगा। माज़ागॉन डॉक घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ तकनीकी सहयोग और उपकरण आपूर्ति के लिये काम करेगा।
15,000 करोड़ रुपये की फंडिंग कंपनी के आंतरिक संचित निधियों और सरकारी वित्तीय साधनों से की जाएगी। यह परियोजना हालिया नीतियों के साथ मेल खाती है, जो ग्रीनफ़ील्ड विकास को प्रोत्साहन और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर केंद्रित हैं। भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी मिलने पर शिपयार्ड का निर्माण मध्य‑2020 के दशक में पूरा होने की उम्मीद है।