📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Indian Navy
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माज़ागॉन डॉक ने अंड्र प्रदेश के दुगरा जपतनाम में 15,000 करोड़ रुपये का व्यापारी शिपयार्ड बनाने का निर्णय लिया
✍️ thehindu.com
🗓 19 सित. 2026, 05:46 AM
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परम्परागत रूप से रक्षा शिपबिल्डर माज़ागॉन डॉक ने अंड्र प्रदेश के दुगरा जपतनाम में 15,000 करोड़ रुपये की निवेश से व्यापारी शिपयार्ड बनाने की योजना घोषित की।
राज्य‑स्वामित्व वाली शिपयार्ड माज़ागॉन डॉक लिमिटेड, जो भारतीय नौसेना के लिए युद्धपोत बनाती है, ने वाणिज्यिक शिपबिल्डिंग में कदम रखने का निर्णय लिया है। कंपनी ने अंड्र प्रदेश के दुगरा जपतनाम में लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत से नया शिपयार्ड स्थापित करने की योजना बनाई है।
यह परियोजना माज़ागॉन डॉक के उत्पाद पोर्टफ़ोलियो को रक्षा जहाजों से बाहर निकालकर माल‑वाहक और कार्गो जहाजों की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने की दिशा में ले जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि नए यार्ड में आधुनिक ड्राई‑डॉक और आउटफ़िटिंग सुविधाएँ स्थापित की जाएँगी, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी।
राज्य सरकार ने इस निवेश का स्वागत किया है, क्योंकि इससे समुद्री तट वाले क्षेत्र में रोजगार सृजन और सहायक उद्योगों के विकास की उम्मीद है। यद्यपि विस्तृत समय‑सीमा अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन यार्ड के अगले कुछ वर्षों में संचालन शुरू होने की संभावना है, जिससे अंड्र प्रदेश रक्षा और वाणिज्यिक शिपबिल्डिंग दोनों का केंद्र बन सकता है।
यह कदम भारत की स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी शिपयार्ड पर निर्भरता घटाने की सरकारी नीति के अनुरूप है। माज़ागॉन डॉक का वाणिज्यिक शिपबिल्डिंग में प्रवेश देश के समुद्री व्यापार बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ कर सकता है।
यह परियोजना माज़ागॉन डॉक के उत्पाद पोर्टफ़ोलियो को रक्षा जहाजों से बाहर निकालकर माल‑वाहक और कार्गो जहाजों की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने की दिशा में ले जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि नए यार्ड में आधुनिक ड्राई‑डॉक और आउटफ़िटिंग सुविधाएँ स्थापित की जाएँगी, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगी।
राज्य सरकार ने इस निवेश का स्वागत किया है, क्योंकि इससे समुद्री तट वाले क्षेत्र में रोजगार सृजन और सहायक उद्योगों के विकास की उम्मीद है। यद्यपि विस्तृत समय‑सीमा अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन यार्ड के अगले कुछ वर्षों में संचालन शुरू होने की संभावना है, जिससे अंड्र प्रदेश रक्षा और वाणिज्यिक शिपबिल्डिंग दोनों का केंद्र बन सकता है।
यह कदम भारत की स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी शिपयार्ड पर निर्भरता घटाने की सरकारी नीति के अनुरूप है। माज़ागॉन डॉक का वाणिज्यिक शिपबिल्डिंग में प्रवेश देश के समुद्री व्यापार बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ कर सकता है।